Monday , October 3 2022

रेलवे के मुद्दे पर प्रीतनगर निवासियों ने की बैठक कर बनाया संघर्ष की रणनीति

घनश्याम पाण्डेय/विनीत शर्मा (संवाददात

-चेयरमैन प्रतिनिधि उष्मान अली बोले नहीं उजड़ने देंगे रहवासियों को

चोपन। स्थानीय प्रीतनगर क्षेत्र के सैकड़ों रहवासियों को रेलवे द्वारा पूर्व में पंजीकृत डाक से नोटिस भेजकर जमीने खाली करने को कहा गया था। नोटिस मिलने से स्थानीय निवासियों में आक्रोश एवं हड़कंप मच गया था। जिसके बाद प्रीतनगर के रहवासियो ने नोटिस का कानूनी जबाब दिया जा रहा है। बैठक की कार्यवाही के सम्बन्ध में प्रीतनगर कई जनता के वकील अमित सिंह ने बताया कि सात दशक बाद रेलवे के कुछ अधिकारियों को अब यहां अपनी जमीनों की सुध आई है और अब वह 1960-70 के दशक में खरीदी गई जमीनों को तलाशने की कवायद में जिसके पास वैध कागज़ात और कब्ज़ा है उसे भी उजाड़ने की कोशिश हो रही है यहां प्रीतनगर क्षेत्र में पिछले कई दशकों से रह रहे रहवासियों ने अपने जीवन भर के कमाई जोड़ अपने मकान बना रखे हैं। जिसमें सैकड़ों परिवार रह रहे हैं और रोजी रोजगार चला रहे हैं। यहां तक की प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी भारी संख्या में लोगों के मकान बने हुए हैं। मुख्य बाजार से प्रीतनगर तक की पूर्व पटरी में इन्हीं जमीनों के अधिकांश हिस्से को रेलवे कागजों में अपना बता रही है। पूर्व में कई बार स्थानीय रेल अधिकारी दल बल के साथ इन्हीं जमीनों को अपना बताते हुए अपने इंजीनियरो की ड्राइंग के अपने नक्शे के मुताबिक मौजूदा रहवासियों को अतिक्रमणकारी करार देते हुए उन्हें भूमि खाली करने की नोटिस दे रहे है। जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जानकार बताते हैं कि वर्तमान में रेलवे के कागजातों और राजस्व विभाग के भू अभिलेख कागजातों में भारी अंतर है रेलवे के जिन कागजातों में यहां रेल भूमि है, वहीं राजस्व विभाग के भू अभिलेखों में रहवासियों की रजिस्ट्री शुदा जमीने है। रहवासी अपनी जमीने किसी भी हालात में छोड़ने को तैयार नहीं है। कई बार मयफोर्स दल बल के साथ गए रेल अधिकारियों को भारी जन विरोध के चलते बैरंग लौटना पड़ा है।अब रेल अधिकारी अपना कानूनी पक्ष मजबूत करते हुए रहवासियों को अवैध अतिक्रमण की नोटिसें पंजीकृत डाक से भेज रहे हैं जो लोगों को मिलनी शुरू हो गई हैं। इस संबंध में प्रीतनगर रहवासियों के अधिवक्ता अमित सिंह ने कहा की रेलवे की नोटिस कानूनी रूप से ही अवैध है। उनकी नोटिस में ना तो पत्रांक,दिनांक और ना ही किसी आराजी नम्बर का जिक्र है उपर से भेजने वाले का न तो नाम है और ना ही पदनाम की मोहर ही है ,जिन ज़मीनों को रेल विभाग अपना कह कर खाली करने की नोटिस दे रहा है वह वर्तमान अभिलेखों में भी उनके नाम पर दर्ज नही है जो लोग आज़ादी के बाद से ही भूमिधर है उनको भी नोटिस दिया जा रहा है प्रीतनगर के लोगो के हितों के लिए कानूनी लड़ाई अंतिम दम तक लड़ी जाएगी तथा जनपद के निर्वाचित प्रतिनिधि आला अधिकारियों के यहाँ प्रतिनिधि मंडल जाकर अपने कागज़ात के साथ अपनी बात रख कर न्याय की गुहार लगाएगा। मौके पर पहुंचे चोपन चेयरमैन प्रतिनिधि उस्मान अली ने कहा कि प्रीतनगर के रहवासियों की हर तरह से मदद की जाएगी नगर को उजड़ने नही दिया जाएगा प्रीतनगर की जनता के सहयोग के लिये न्याय के प्रत्येक दरवाजे को खटखटाया जाएगा। इस मौके पर सोनांचल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश मिश्रा, सभासद रूपा देवी, सभासद सर्वजीत यादव, मोम बहादुर, दीना सेठ, जहांगीर दिलीप सिंह समेत सैकड़ो लोग लोग मौजूद थे।

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