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उबैदुर्रहमान “सितारा-गाजीपुर” अवार्ड से सम्मानित

फ़ैयाज़ खान मिस्बाही(ब्यूरो)

गाजीपुर। अल्फ्लाह साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थान, टेढ़ी बाजार के सभागार में रविवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें मशहूर साहित्यकार एवं इतिहासकार उबैदुर्रहमान सिद्दीकी के शायरी संग्रह “शहर का सुकरात” का विमोचन किया गया। उन्हें उनके रचनात्मक योगदान पर “सितारा-गाजीपुर” अवार्ड एवं सनद से सुशोभित किया गया।

इस मौके पर अल्फ्लाह संस्थान के अध्यक्ष अरशद कादरी ने कहा कि जिस तरह उबैदुर्रहमान साहब अनवरत 35 वर्षों से रचनात्मक लेखन में लगे रहकर एक हज़ार से ऊपर प्रकाशित हिंदी, अंग्रेजी एवं उर्दू लेख तथा 14 पुस्तकों की रचना धर्मी की हैं, उनकी इस रचना योगदान पर हमारी संस्था उन्हें अंगवस्त्रम तथा सितारा-गाजीपुर अवार्ड देते हुए हर्ष महसूस कर रही है। मुख्य अतिथि दिल्ली विश्विद्यालय की फ़ारसी विभागाध्यक्ष सैय्यदा प्रो. बिल्किस फातिमा ने कहा कि उबैद साहब इतनी कम आयु में जो इतिहासिक एवं साहित्यिक परिवेश में बुलंदी हासिल की है, वह उनके समर्पित भाव को उजागर करती है। उनकी शायरी में अली सरदार जाफरी, साहिर और जावेद अख्तर की झलक मिलती है। मुंबई के नज्फी शैक्षिक विभाग के प्रो. सैय्यद हुसैन मेंहदी हुसैनी साहब ने कहा कि जिन लोगो में साहित्य के प्रति समर्पण भाव होता है, उनके साहित्य में बड़ी ऊर्जा होती है और यह गुण उबैद साहब में देखता हूं। आबिद हाश्मी ने अपने अध्यक्षीय उम्बोधन में कहा कि उबैदुर्रहमान साहब डाक्टर राही मासूम रजा के बाद अपने समाज को बहुत भीतर से जाकर उनके मर्म, दुख-सुख को अपनी शायरी द्वारा उन्हें उजागिर किया है। बेहतरीन शायरी का उनका यह प्रथम संग्रह है, जिसमें अधिकतर शायरी पढ़ने योग्य है। मशहूर शायर कदर पारवी, हंटर गाजीपुरी, अनवर जमाल, आफाक गाजीपुरी ने भी अपना विचार व्यक्त किया। इस अवसर पर ओरिएंटल कालेज बनारस के प्रिंसिपल आबिद हाश्मी साहब, समाजसेवी अहमर जमाल, डा. अब्दुल सत्तार, डा. लइक अहमद, डा. अकबर आजम, जमील खान, रुहुल्लह खान आदि उपस्थित थे। संचालन अफजल कादरी और शहाबुद्दीन ने किया।

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