Friday , September 30 2022

पंक्चर बनाने वाले हाथ अब तराश रहे मूर्तियां

संजीव कुमार पांडेय (संवाददाता)

चुनार चुनार तहसील के सोनवर्षा गांव निवासी अविनाश मौर्य अब साइकिल का पंक्चर बनाने की बजाय मूर्तियों को तराश रहे हैं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित शासकीय महाविद्यालय से 2018 में फाइन आर्ट्स में मास्टर की डिग्री के साथ ही वह आरएमटीएमए विश्वविद्यालय के टापर भी रहे। ग्वालियर से लौटने के बाद कोई रोजगार न मिलने के कारण खर्च संभालने के लिए पिता की साइकिल पंक्चर की दुकान संभालने लगे। इसमें मन नहीं रमा तो विंध्य पहाड़ी के बलुआ पत्थरों को खरीदकर मूर्ति बनाने में जुट गए। 2019 से मूर्ति बनाना शुरू किया तो फिर उनकी मूर्तियों की मांग आसपास के जिलों में भी शुरू हो गई। कुछ ही समय में अविनाश के हाथों से बनी मूर्तियों की डिमाण्ड प्रदेश के बाहर पड़ोसी राज्य बिहार और मध्य प्रदेश के साथ ही नेपाल व श्रीलंका तक हो गई। खासकर गौतम बुद्ध और अशोक स्तम्भ की मांग बिहार व मध्य प्रदेश के साथ ही नेपाल के साथ श्रीलंका तक है। अविनाश अब तक पांच सौ से अधिक मूर्तियां बनाकर बेच चुके हैं। अशोक स्तम्भ व अन्य मूर्तियों को खरीदने वाले अब सीधे अविनाश मौर्य से सम्पर्क कर लेते हैं।
अविनाश कभी पिता की दुकान पर पंक्चर जोड़ने का काम करते थे। अविनाश मौर्य को जब ग्वालियर या अन्य कहीं डिग्री के मुताबिक नौकरी नहीं मिली तो 2018 में घर लौट आए। इसके बाद पिता की पंक्चर की दुकान पर साइकिल का पंक्चर बनाने लगे। यह कार्य उन्होंने 2019 तक किया। इसके बाद मूर्ति बनाने में जुट गए। हालांकि अभी भी वे अपने कार्यों से खाली होने के बाद पिता के काम में हाथ बंटाते हैं। इसका उन्हें कोई मलाल भी नहीं है।

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