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यह गायों की मंडी नहीं बल्कि…

अंशु खत्री/दिलीप श्रीवास्तव (संवाददाता)

चुर्क । योगी सरकार सत्ता में आई तो गायों की दशा सुधारने के लिए पूरे प्रदेश में गोवंश आश्रय खुलवा दिया ताकि छुट्टा व आवारा पशुओं को वहां रखकर उनकी जिंदगी बचाई जा सके । यह योजना शुरुआती दौर में तो ठीक ठाक चला लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता रहा यह योजना ध्वस्त हो गयी । शायद यही कारण है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान गाय को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा है कि गौरक्षा को किसी भी धर्म से जोड़ने की जरूरत नहीं है । गाय को अब एक राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए । और केंद्र को इस पर विचार करने की जरूरत है ।लेकिन केंद्र अब तक इस पर कोई मसौदा तैयार कर सका है और न पशुओं की रक्षा के लिए कड़ाई ।

यह तस्वीर सोनभद्र के एक छोटे से नगर पंचायत चुर्क की है । आप तस्वीरों में भी देख सकते हैं कि किस तरह गाय सड़कों पर बैठी हैं, जिसका कोई सुधि लेने वाला नहीं है । स्थानीय लोगों का कहना है कि छुट्टा पशुओं की वजह से आये दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं । कभी पशु अचानक गाड़ी के सामने आ जाते हैं तो कभी सड़क पर बैठी गायों से टक्कर हो जाती है । लोगों का कहना है कि किससे कहें कोई सुनने वाला नहीं है । हर कोई टालने की बात करता है । लेकिन यह बड़ी समस्या है कि सरकार के चाहने के वाबजूद स्थानीय प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा ।

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नगर में घूम रहे आवारा पशुओं को पकड़कर गौवंश आश्रय स्थल में भेजवाएँ। ताकि दुर्घटना के साथ गायों को भी बचाया जा सके।

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