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आकांक्षी जनपद का हाल : सोनभद्र में स्कूलों की दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार ?

अभी आपने जिन तस्वीरों को देखा है वह कोई पर्यटक स्थल नहीं बल्कि सोनभद्र के स्कूल हैं । यह बात और है कि इस तरह के स्कूल भारत में ही देखने को मिलते हैं । अब इस तरह के स्कूल होंगे तो जाहिर है शिक्षा कैसा होगा यह आप सोच सकते हैं । फिर भी योगी सरकार लगातार दावे करती है कि जब से उनकी सरकार सूबे में आई है शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला दी है।

चोपन ब्लाक के गुरमुरा में स्थित यह स्कूल पिछले 4 सालों से बन कर तैयार है मगर न किसी को शुरू करने की फुर्सत मिली और न इसका मुहूर्त निकल सका । नतीजा यह रहा कि कई आदिवासी बच्चे आज भी स्कूल के अभाव में अपनी पढ़ाई बंद कर दिये ।

ऐसा नहीं कि सोनभद्र में यह अकेला स्कूल है, चोपन में बन रहे पालीटेक्निक स्कूल की दशा देखकर आपको भी हैरानी होगी कि आखिर सरकारें किस तरह अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर में जनता की गाढ़ी कमाई को बर्बाद कर रहे हैं । पानी की तरह पैसा बहाया गया लेकिन नतीजा आपके सामने है । लोगों का कहना कि एक तरफ सरकार बजट का रोना रोती है तो दूसरी तरफ धन का बर्बादी कर रही है, जब स्कूल चलाना नहीं था तो आखिर क्यों बनवाया गया ।

देखें वीडियो-

सोनभद्र में जनप्रतिनिधियों की लापरवाही व उपेक्षा के चलते स्कूलों की दुर्दशा बना हुआ है ।

अब कोन क्षेत्र के पिपरा खाड़ को देख लीजिए, जहां स्कूल की बिल्डिंग तो बन कर तैयार है मगर इसका भी मुहूर्त नहीं निकल सका। जिसकी वजह से यह स्कूल की बिल्डिंग भी धूल फांक रही है ।

बहरहाल देश के प्रधानमंत्री ने सोनभद्र को आकांक्षी जनपदों की सूची में इसलिए शामिल किया ताकि यह जनपद पिछड़े जनपद की दंश से बाहर निकल सके । मगर सरकार की पोल खोलती यह तस्वीर इस बात की गवाही है कि कैसे नीति आयोग भी सिर्फ कागजों पर चल रही है और मनचाहे जिलों को नम्बर वन बना दिया जाता है ।

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