आस्था: प्रभु के साथ प्रेम का खेल हैं अद्भुत, जानें

परमात्मा के सच्चे खेल या परमात्मा की लीला का दुनिया के खेल से कोई लेना-देना नहीं है। परमात्मा का अलग खेल चल रहा है। यह वह खेल है, जो प्रेम के नियम पर आधारित है। यह एक ऐसा खेल है, जिसमें परमात्मा हमसे प्रेम करते हैं और वे चाहते हैं कि हम भी उनसे प्रेम करें। यह प्रेम सिर्फ परमात्मा एवं प्रत्येक जीवित प्राणी के बीच का प्रेम नहीं, अपितु इसमें प्रभु के समस्त परिवार के सदस्यों को भी प्रेम करना है।

पिता-परमेश्वर प्रेम और आनंद के महासागर हैं। जब हम उनसे जुड़ते हैं, तो हम भी परमानंद के महासागर में डुबकी लगाते हैं। यह संसार के किसी भी खेल की तुलना में अधिक मजेदार है। यह बहुत सारा पैसा बनाने से, और यह सभी सांसारिक सुखों से बेहतर है। यह वह खुशी है, जिसकी तुलना में इस दुनिया में पाए जाने वाले सारे आनंद फीके हैं। जब हम इस संसार को छोड़ते हैं, तब हमें इस बात से परखा जाता है कि हम अपने जीवन में दूसरों से कितना प्रेम करते थे? हमारे जीवन की जांच इस तथ्य पर आधारित होती है कि हमने दूसरों को कितना प्रेम दिया है और उन्हें कितनी खुशी दी है? जब हम इस जीवन के अंत में अपने आप पर एक सरसरी निगाह डालते हैं, तब वह संपूर्ण प्रेम, जो हमने दूसरों को दिया और वह खुशी, जो हमारे द्वारा दूसरों को मिली, उसे हम स्वयं अपने अंदर महसूस करते हैं।

हम जो समय प्रभु के प्रेम से जुड़ने में लगाते हैं, वह हमारी आध्यात्मिक चेतनता को बढ़ाता है और हमें इस भौतिक शरीर से ऊपर उठने की कला में भी सक्षम बनाता है, ताकि हमारी रूह रूहानी मंडलों में उड़ान भर सके और पिता-परमेश्वर से हमेशा के लिए एक हो जाए। हम देखें कि जब जीवन के अंत में हमें अपने रुपये-पैसे और जायदाद को यही छोड़ कर जाना होगा, तो हम अपने साथ केवल वही समय साथ ले जाएंगे, जो केवल हमने प्रभु के नाम का जाप करने में लगाया है। हम अपने साथ एक ऐसा खाता ले जाएंगे, जिसमें कोई अच्छे या बुरे कर्म नहीं होंगे, बल्कि जिसमें ध्यान-अभ्यास में लगाए गए समय और संत-महापुरुषों की याद में बिताए गए समय का लेखा-जोखा होगा। प्रभु के प्रेम में लगाया गया समय ही सही मायनों में प्रभु के साथ प्रेम का खेल खेलना है।

अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...
Back to top button
error: Content is protected !!