चाणक्य नीति: हमेशा घिरे रहते हैं परेशानी से ऐसे लोग, जानें

आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में जीवन की समस्याओं को हल करने वाली नीतियों का वर्णन किया है। सालों बाद भी आज भी चाणक्य की नीतियां प्रासंगिक हैं। लोग इन नीतियों को अपनाकर सफलता प्राप्त करते हैं। चाणक्य की नीतियों ने ही एक साधारण बालक चंद्रगुप्त को मौर्य वंश का सम्राट बना दिया था। कहते हैं कि चाणक्य की नीतियों को अपनाना मुश्किल होता है, लेकिन जिसने भी अपनाया उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सका।

नीति शास्त्र में बताई गई नीतियां व्यक्ति को धर्म और ज्ञान के आधार पर सही और गलत में भेद बताती हैं। आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र के एक श्लोक में ऐसे लोगों के बारे में बताया है जो जीवन में किसी न किसी वजह से परेशान रहते हैं।

नात्यन्तं सरलेन भाव्यं गत्वा पश्य वनस्थलीम्,
छिद्यन्ते सरलास्तत्र कुब्जास्तिष्ठन्ति पादपाः।

चाणक्य ने इस श्लोक में इंसान की तुला पेड़ों से करते हुए कहा है कि जिन लोगों का स्वभाव बहुत सरल यानी सीधा-साधा है, उन्हें अपने इस स्वभाव को बदलना चाहिए। क्योंकि जंगल में उन्हीं पेड़ों को सबसे पहले काटा जाता है जो सीधे होत हैं।

इस श्लोक के जरिए चाणक्य ने समझाने की कोशिश की है कि हर चीज की अति बुरी होती है। अगर अति से ज्यादा सीधे, सहज और सरल हैं तो इसका खामियाजा आपको भुगतना पड़ सकता है। आपके स्वभाव के कारण कई बार लोग आपका फायदा उठाते हैं और आपके लिए मुश्किलें खड़ी कर देते हैं।

कई बार ज्यादा सीधा होने पर व्यक्ति को उस गलती की सजा भी भुगतनी पड़ती है, जो उसने नहीं की होती है। इस वजह से परिवार के लोगों को भी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ता है। इसलिए व्यक्ति को तेज और चतुर इतना होना चाहिए कि वह अपनी सुरक्षा स्वयं कर सके। अपने लक्ष्यों का पाने के साथ ही परिवार की सुरक्षा कर सके।

यह आलेख धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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