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हरतालिका तीज पर सुहागिनों ने रखा व्रत, सुनी कथा

घनश्याम पांडेय/विनीत शर्मा (संवाददाता)

० सुहागिन महिलाओं की हरतालिका तीज में गहरी आस्‍था है

० महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं

चोपन। जिले भर में गुरुवार को महिलाओं ने हरतालिका तीज का व्रत रखा और शिव-पार्वती की पूजा की। हरतालिका तीज का व्रत हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा व्रत माना गया हैं। चोपन नगर में भी हरतालिका तीज में महिलाओं और युवतियों ने भगवान शिव, माता गौरी और गणेशजी की पूजा कर निराहार एवं निर्जला व्रत रखा और मंदिरों में पूजा अर्चना की। मंदिर में महिलाओं ने पूजा अर्चना कर व्रत की कथा का सुनी।
बता दे कि, भारतीय लोक संस्कृति में ऐसे कई त्योहार हैं, जो परिवार और जीवनसाथी की मंगलकामना के भाव से जुड़े हैं। हरतालिका तीज भी मुख्यतः स्त्रियों का त्योहार है, जो जीवन में प्रेम-स्नेह की सोंधी सुगंध और आपसी जुड़ाव का उत्सव है। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। अखंड सौभाग्य का यह पर्व इस बार 9 सितंबर, गुरुवार को मनाया गया। इस दिन महिलाएं पति के लिए उपवास रखकर शिव-गौरी का पूजन-वंदन कर सुरीले स्वर में सावन के गीत-मल्हार गाती हैं। पूजा-अर्चना के साथ यह त्योहार एक पारंपरिक उत्सव के रूप में जीवन में नए रंग भरता है, दांपत्य में प्रगाढ़ता लाता है, साथ ही परिवार और समाज को स्नेह सूत्र में बांधता है।
मनचाहा वर पाने के लिए कुंवारी लड़कियां भी भगवान शिव और माता पार्वती के लिए इस व्रत को रखती हैं। परिवार की कुशलता के लिए किए जाने वाले इस व्रत में शिव-पार्वती के साथ गणेशजी की पूजा होती है। प्रकृति और प्रेम के भाव से जुड़े इस पर्व पर महिलाएं मिट्टी या बालू से मां पार्वती और शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा करती हैं। शिव-पार्वती के वंदन से जुड़े इस पर्व पर विवाहित स्त्रियां तो निर्जला व्रत रखकर पति की लंबी आयु और सुखद दांपत्य जीवन के लिए प्रार्थना करती है।

शास्त्रों के अनुसार मान्‍यता है कि, हिमवान की पुत्री माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्‍त करने के लिए पूरे तन-मन से करीब 108 सालों तक घोर तपस्‍या की। पार्वती के तप से प्रसन्‍न होकर शिव ने उन्‍हें पत्‍नी के रूप में स्‍वीकार कर लिया। तीज पर्व पार्वती को समर्पित है, जिन्‍हें तीज माता कहा जाता है।
हरतालिका तीज का महत्‍व सभी चार तीजों में हरतालिका तीज का विशेष महत्‍व है- हरतालिका दो शब्‍दों से मिलकर बना है- हरत और आलिका। हरत का मतलब है ‘अपहरण’ और आलिका यानी ‘सहेली’। प्राचीन मान्‍यता के अनुसार मां पार्वती की सहेली उन्‍हें घने जंगल में ले जाकर छिपा देती हैं, ताकि उनके पिता भगवान विष्‍णु से उनका विवाह न करा पाएं। सुहागिन महिलाओं की हरतालिका तीज में गहरी आस्‍था है। महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। मान्‍यता है कि, इस व्रत को करने से सुहागिन स्त्रियों को शिव-पार्वती अखंड सौभाग्‍य का वरदान देते हैं। वहीं कुंवारी लड़कियों को मनचाहे वर की प्राप्‍त‍ि होती है।

हरतालिका तीज के व्रत के नियम

1. इस व्रत को सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्‍याएं रखती हैं, लेकिन एक बार व्रत रखने के बाद जीवन भर इस व्रत को रखना पड़ता है।
2. अगर महिला ज्‍यादा बीमार है तो उसके बदले घर की अन्‍य महिला या फिर पति भी इस व्रत को रख सकता है।
3. इस व्रत में सोने की मनाही है, यहां तक कि रात को भी सोना वर्जित है। रात के वक्‍त भजन-कीर्तन किया जाता है।

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