Friday , September 30 2022

एक गांव ऐसा भी, जहां माटी के लाल, माटी से हो गए दूर

मिट्टी….चाहे अपने वतन की हो या फिर गांव की….हर किसी को उससे जरूर प्यार होता है । मगर एक सच यह भी है कि मनुष्य पढ़ लिखकर जैसे-जैसे आगे बढ़ता वह अपनी मिट्टी से दूर होता जाता है । वह भले इसे अपनी मजबूरी बताए मगर शायद यह सच है कि अक्सर लोग तरक्की के चक्कर में अपनी जन्मभूमि को भूल जाते हैं ।

आज हम जिस मिट्टी की बात करने जा रहे हैं । उस मिट्टी से कई बड़े बड़े जज बैरिस्टर नेता व अधिकारी निकले मगर आज भी वह गांव अपनी पहचान का मोहताज है । जिस मिट्टी की खुशबू प्रदेश तक महकनी चाहिए आलम यह है कि उसे जनपद में भी बहुतेरे लोग नहीं जानते ।आज यह गांव पूरी तरह से उपेक्षा का शिकार है ।

जिला सोनभद्र मुख्यालय से लगभग 80 किमी0 दूर एक गांव है महुली…. दुद्धी ब्लाक क्षेत्र में स्थित महुली गांव देखने में भले ही साधारण व उपेक्षित लगता हो मगर इस धरती ने कई ऐसे लाल को जन्म दिया जो आज देश – विदेश में अपना एक नया मुकाम हासिल किया है । महुली गांव की बात करे तो यहां लगभग हर घर से एक सदस्य सरकारी नौकरी में है ।

एक वक्त था जब ग्रामीणों को इस बात की खुशी व उम्मीद थी कि महुली गांव से इतनी बड़ी संख्या में सरकारी नौकरी पाने के बाद गांव की तस्वीर जरूर बदलेगी।

और फिर वक्त गुजरता रहा मगर गांव की तस्वीर नहीं बदली ।
हालांकि गांव के अन्य युवा अपने बड़ों के पदचिन्हों पर चलकर अपनी तकदीर जरूर बदल लिए।


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मगर गांव की दुर्दशा को लेकर आज भी स्थानीय लोगों के अंदर मलाल जरूर है । उनका कहना है कि जो लोग बाहर चले गए वे गांवों के बारे में सोचना शायद इसलिए बंद कर दिए क्योंकि उनकी कुछ मजबूरी रही होगी ।

गांवों की बदहाली को लेकर हर लोगों में नाराजगी देखी जा सकती है । उनका मानना है कि उच्च पदों पर बैठे लोग सिर्फ अपने बारे में सोचे, जिसका नतीजा यह रहा कि गांव गर्त में चला गया और आज कोई सुधि लेने वाला नहीं है ।

लम्बे समय से महुली गांव की पहचान खेल से भी हुआ करती थी । आज भी फुटबाल का खेल होता है मगर वह सिर्फ परम्परा धर्म निभाने के लिए । जिस तरह से महुली गांवों के खिलाड़ी खेल में अपना जौहर दिखलाते थे, लोगों को उम्मीद थी कि यहां के लड़के खेल में भी गांव का नाम रौशन करेंगे । मगर आज यहां का खेल मैदान चारागाह बना हुआ है।

बहरहाल कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि पेड़ चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए वह अपने जड़ से अलग नहीं हो सकता । जड़ जितना मजबूत होगा टहनियां उतनी ही मजबूत होंगी वरना समय के साथ उस पर न तो नए पत्ते आएंगे और न अस्तित्व ही बचेगा ।

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