Tuesday , October 4 2022

अवैध परिवहन पर सोनभद्र प्रशासन का फंडा साफ, जेब गर्म होती रही तो सब कुछ जायज

शान्तनु कुमार

यदि आप सोनभद्र में हैं और हाइवे पर फर्राटा भर रही लोड ट्रकों को देखकर इस बात से खुश हो रहे हों कि लगता है सोनभद्र में खनन पटरी पर लौटने लगा है, तो आप गलत हैं । आप जान लीजिए सड़कों पर फर्राटा भर रही ट्रकें भले ही राज्य सरकार की सड़कों पर दौड़ रही हों मगर जेबें व खजाना हाकिमों का गर्म कर रहीं हैं । जिन फर्राटा भर रही गाड़ियों को देखकर आप खुश हो रहे हों उसके पीछे की कहानी ही शायद आप के नजर से ओझल है, तो चलिए हम बता देते हैं इस खेल का राज क्या है ।

दरअसल सोनभद्र में इन दिनों गाड़ियों की बाढ़ सी आ गयी है । एकाएक सोनभद्र में गाड़ियों के बढ़ने के पीछे एक बड़ी वजह है अधिकारियों व कर्मचारियों का परिवहन माफियाओं के साथ गठजोड़ । क्योंकि सोनभद्र में बालू की एक भी साइडें नहीं है और पत्थर खदान भी नाम मात्र के चल रही । ऐसे में सोनभद्र में गाड़ियों के आने का सिलसिला थम सा गया था । लेकिन जैसे ही अधिकारियों व कर्मचारियों ने परिवहन माफियाओं के साथ साठगांठ की एकाएक गाड़ियों की बाढ़ सी आ गयी ।

ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि इन दिनों मारकुंडी में कई जगहों से टोकन बांटा जाता है, जिसे लेकर चलने पर आपकी गाड़ी चेक नहीं होगी, यहां तक कि आप कुछ भी लेकर जाओ कोई पूछने वाला नहीं ।

नक्सल प्रभावित जनपद में जिस तरह से बिना नम्बर की गाड़ियां बार्डर पार कर जिले में फर्राटे भर रही है उससे एक बात तो साफ हो गया कि योगी राज में अधिकारियों की चांदी कट रही है । मजे की बात देखिये परिवहन विभाग कार्यालय के सामने से गाड़ियां बिना नम्बर की फर्राटे भर रही हैं लेकिन विभाग मौन है ।

लोगों का कहना हैं कि परिवहन विभाग व पुलिस सिर्फ छोटी गाड़ियों को चेक कर परेशान करती है जबकि ट्रकों को छोड़ दिया जाता है। लोगों का कहना है कि योगीराज में तैनात अधिकारी व कर्मचारी अपने फायदे के लिए कोई भी कदम उठाने को तैयार हैं । लोगों का कहना है कि जीरो टॉलरेंस वाली सरकार में अधिकारी इस कदर बेलगाम हो चले हैं कि उन्हें किसी का डर नहीं। पहले तो ओवरलोड ट्रकें देर रात निकला करती थीं लेकिन अब तो दिन में भी बेरोकटोक फर्राटे भर रही है।

जहां एक तरफ योगी सरकार चुनावी तैयारियों में जुटी हुई है वहीं उनके अधिकारी व कर्मचारी उनकी लुटिया डुबोने पर आमादा हैं । गौर करने वाली बात यह है कि जिले के लगभग सभी राजनीतिक दल भले ही अन्य मुद्दों पर एक दूसरे के विरोध में खड़े हों मगर खनन व परिवहन के मामले में सब एक विचारधारा के हैं ।शायद यही कारण है कि सरकार चाहे किसी की भी रही हो खनन व परिवहन के मामले में वे फेल रहे हैं ।

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