Tuesday , October 4 2022

क्या नक्सलियों से ज्यादा खौफ़नाक हैं खनन व परिवहन माफिया ? पढ़ें यह रिपोर्ट

शान्तनु कुमार

सोनभद्र, एक ऐसा जनपद जो सूबे को रौशन किये जाने के साथ सबसे ज्यादा राजस्व भी देता है । लेकिन खुद यह जनपद पिछड़े जनपदों में शामिल है । वर्षों नक्सल की दंश झेलने वाले जनपद सोनभद्र से नक्सल का खात्मा हुआ तो अब अवैध खनन व परिवहन ने इसकी जगह ले ली । पिछले कई वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सोनभद्र में कोई भी नक्सल घटनाएं नहीं हुई लेकिन पुलिस आज भी अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए लगातार जंगलों में काम्बिंग करती चली आ रही है ।

लेकिन वहीं खनन पर नजर डालें तो हर साल कोई न कोई बड़ी घटना घटती रही है जिससे जिला बदनाम होता रहा है । सरकार चाहे किसी की भी हो हर सरकार में खनन माफिया हमेशा से सरकार पर भारी पड़ते रहे हैं । मौजूदा सरकार में तो अवैध परिवहन माफियाओं को रोकने के लिए सेना से रिटायर्ड जवानों को ही लगा दिया गया । लेकिन फिर भी अवैध परिवहन नहीँ रुक सका । तो क्या यह मान लिया जाय कि नक्सल से खतरनाक हैं अवैध खनन व परिवहन माफिया ? क्योंकि यदि आप नक्सल व अवैध खनन- परिवहन में तुलना करें तो सच्चाई यही सामने निकल कर आएगी कि हमारे पुलिस के जवान जंगलों में तो नक्सलियों के खात्मे के लिए बिल्कुल फिट हैं तो फिर खनन व परिवहन माफियाओं से निपटने में आखिर क्यों कमजोर हैं । पिछले कुछ दिनों से सोनभद्र हाइवे पर जो नजारा देखने को मिल रहा है उस पर परिवहन व पुलिस प्रशासन ने तो अपने हाथ खड़े कर दिए हैं चाहे उनकी कोई भी मजबूरी हो । लेकिन इसके साथ ही जिले के जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी मौन स्वीकृति दे रखी है । जनप्रतिनिधियों का हाल यह है कि सिर्फ योजनाओं के उद्घाटन तक सीमित रह गए हैं । समस्याओं को देखकर भी अनदेखी कर रहे हैं ।

जिले में जिस तरह से बिना नम्बर की ट्रकें फर्राटा भर रही हैं उससे न सिर्फ सरकार का प्रतिदिन करोड़ों का नुकसान हो रहा है बल्कि सरकार की छवि भी खराब हो रही है । ऐसे में जनप्रतिनिधियों की चुप्पी लोगों के गले नहीं उतर रही ।

एक तरफ योगी सरकार यूपी में बेहतर क़ानून व्यवस्था होने का दावा कर रहे हैं लेकिन वहीं सोनभद्र में वे कौन हैं जो बेखौफ तरीके से जिले में बिना नम्बर की गाड़ी लोड कर चल रहे हैं औऱ पुलिस व प्रशासन मूक दर्शक बनी हुई है ।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि नक्सल फ्रंट पर भले ही पुलिस का कदमताल एक जैसा रहता है मगर अवैध खनन व परिवहन के मामले में उनका तालमेल अलग-अलग दिखता है । अब ऐसा क्यों है यह तो जांच करने पर सामने आएगा । लेकिन इन दिनों सोनभद्र एक बार फिर चर्चा में है मगर इस बार नक्सल के लिए नहीं बल्कि अवैध खनन व परिवहन के लिए ।

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