Friday , September 23 2022

एक महीने बाद भी दर्ज नहीं हुआ आदिवासियों का मामला, पुलिस कप्तान ने लिया सज्ञान

संजय केसरी/अर्जुन मौर्या (संवाददाता)

डाला । पिछले 29 जुलाई को साइबर क्राइम के शिकार हुए गरीब आदिवासियों को न्याय मिलना तो दूर आज तक उनके शिकायती पत्र थाने में दर्ज तक नहीं हुआ । ठगी के शिकार के हुए आदिवासी घटना के अगले दिन ही थाने पहुंचकर तहरीर दी थी । बताया जाता है कि पहले तो थाने में मौजूद कुछ पुलिस कर्मियों ने उनकी खिल्ली भी उड़ाई फिर उनकी तहरीर लेकर रख लिया ।

अब इस मामले में पीड़ित आदिवासियों ने पुलिस कप्तान से फोन पर बात की है । हस्तक्षेप के बाद कप्तान ने गरीब आदिवासियों को थाने पहुंचकर मामला दर्ज करवाने के लिए एक बार फिर आग्रह किये जाने की बात कही है ।

आपको बतादें कि चोपन थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत कोटा के टोला कानोपान में 29 जुलाई को कुछ युवक अधिकारी बन कर आए और आवास तथा शौचालय भरवाने के नाम पर उनसे आधार व बैंक पासबुक मंगाकर उनसे ठगी कर खाते से पैसा निकाल लिया । गरीब आदिवासियों को मामले की जानकारी शक होने पर हुई लेकिन तब तक उनके खाते से पैसे निकल चुके थे ।

ग्रामीणों के मुताबिक सुखदेव पुत्र बोधन के खाते से 2000 (दो हजार), फुलमतिया पत्नी रामबिलास के खाते से 5000( पांच हजार), क़िस्मतीय पत्नी रामप्रसाद, 150 एक सौ पच्चास, मान कुँवर पत्नी दसई के खाते से 5000 (पांच हजार), सुबित्री पत्नी सुखलाल के खाते से (1000 एक हजार), भगवान दास पत्नी सुखदेव के खाते से 4000 (चार हजार), बुधनी पत्नी राम सिंह के खाते से 1000(एक हजार), व राम सुंदर पुत्र लोकई के खाते से 1000 (एक हजार) रुपये निकाले गए हैं ।

तब से ग्रामीण मामला दर्ज करने के लिए थाने के चक्कर लगा रहे हैं । लेकिन जब कोई कार्यवाही नहीं हुई तो आखिरकार वे थक हारकर पुलिस अधीक्षक से फोन पर गुहार लगाई । पुलिस कप्तान ने मामले को गंभीरता से सुना और एक बार फिर थाने जाने को कहा । पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद उम्मीद है कि गरीब आदिवासियों को उनके ठगी के पैसे वापस मिल जाय साथ ही न्याय मिल जाय ।

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