Tuesday , October 4 2022

सोनभद्र कैसे परिवहन माफियाओं के लिए बन गया सबसे महफ़ूज ठिकाना

आनंद चौबे/अंशु खत्री (संवाददाता)

सोनभद्र में भले ही लाल रेत की एक भी खदाने न हों मगर इन दिनों सोनभद्र में चलने वाले मोटर मालिक कमाई कर लाल हो गए हैं। भौगोलिक स्थिति को देखते हुए जनपद सोनभद्र में ठिकाना हमेशा से महफ़ूज माने जाते रहे हैं, चाहे नक्सलियों के समय हो या फिर परिवहन माफियाओं के समय ।
पिछले तीन दिनों से सलखन से लेकर लोढ़ी टोल गेट तक ट्रकों का रेला लगा हुआ था । शुक्रवार को जब जिले में वीआईपी का दौरा हुआ तो प्रशासन के हाथ-पांव फूलने लगे, आनन-फानन में मारकुंडी के नीचे खड़ी गाड़ियों को ऊपर भेजा जाने लगा । और फिर देखते-देखते सभी गाड़ियां रफ्तार में टोल पार करते हुए खनिज बैरियर पर बिना जांच कराए निकल गयी ।
सबसे चौकने वाला नजारा यह था कि ओवरलोड माल लेकर फर्राटा भरने वाली गाड़ियों में ज्यादातर गाड़ियों के नम्बर या तो थे नहीं या फिर खरोंच दिए गए थे या फिर उस पर कालिख पोत दिया गया था ।


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यानी यह कहा जा सकता है कि इन दिनों सोनभद्र अवैध खनन से लेकर अवैध परिवहन माफियाओं के लिए सबसे महफ़ूज जिला बन गया है ।
यह हाल तब है जब जिले में अवैध परिवहन रोकने के लिए सेना के रिटायर्ड जवानों के अलावा भारी संख्या में फोर्स व अधिकारी तैनात किए गए हैं । प्रशासन इनकी तैनाती के समय यह दावा किया था कि कोई भी परिंदा पर नहीं मार सकेगा । हाल के दिनों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए जिलाधिकारी ने कई खनिज बैरियरों को खत्म तक कर दिया ।

जहां एक तरफ खनिज विभाग खदान न खुलने पर अक्सर अपना रोना रोता रहा है । वहीं प्रशासन दावा करता है कि यह ओवरलोड ट्रकें गैर प्रान्तों से माल लोडकर आ रही हैं।
अब यदि प्रशासन के दावे को ही मान कर चलें तो सवाल यह उठता है कि बार्डर से लेकर मारकुंडी के बीच में कई थाने व चौकियां पड़ती हैं । आखिर वहां से ये गाड़ियां पार कैसे हुई ..? क्या जिस सिस्टम की बात ट्रांसपोर्टर करते हैं वहीं है तो फिर प्रशासन झूठे दावे करता ही क्यों है ।

कुछ माह पूर्व इसी जाम के झाम को देखते हुए सीओ सिटी ने चोपन थानाध्यक्ष को पत्र लिखकर नाराजगी जाहिर की थी और कहा था कि यदि सड़क पर जाम लगा तो सम्बंधित के खिलाफ कार्यवाही होगी । लेकिन इस आदेश को ठेंगा दिखाते हुए लगातार जाम लग रहा है मगर कोई कार्यवाही आज तक न हुई और न कभी दिखी ।
ऐसा नहीं कि उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं, उच्च अधिकारी को यहां तक जानकारी है कि कौन-कौन कहाँ -कहाँ अवैध खनन में लिप्त है । एएसपी ने तो बकायदे एसपी के निर्देश पर ओबरा सर्किल को पत्र लिखकर खनन माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए निर्देश दिया था मगर यहां भी आदेश को ठेंगा दिखा दिया गया ।

नक्सल प्रभावित जनपद में जिस तरह से जिले में बिना नम्बर ट्रकें फर्राटा भर रही हैं वह प्रशासन के लिए चिंता का विषय है और प्रशासन को इसके लिए गंभीरता से सोचने की जरूरत है ।

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