Monday , October 3 2022

नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को 20 साल की कैद

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

अर्थदंड ना देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद

● अर्थदंड की धनराशि पीड़िता को नियमानुसार मिलेगी

● लापरवाह विवेचक रविंद्र भूषण मौर्य के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए शासन को भेजा गया आदेश की प्रति

सोनभद्र । अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट पंकज श्रीवास्तव की अदालत ने आज दुष्कर्म के मामले में दोषी रामनरायन को दोष सिद्ध पाकर 20 वर्ष की कैद एवं ₹25000 अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं अर्थदंड की धनराशि नियमानुसार पीड़िता को मिलेगी। कोर्ट ने लापरवाह विवेचक रविंद्र भूषण मौर्य के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ को भेजा है।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक चोपन थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता के पिता ने चोपन थाने में 25 अप्रैल 2016 को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि उसकी 14 वर्षीय नाबालिग बेटी 23 अप्रैल 2016 को बारात देखने गई थी जब बारात देख कर रात करीब 11:15 बजे घर आ रही थी तभी रास्ते में अकेले पाकर रामनारायण पुत्र जगदीश पनिका निवासी कोटा-चोपन उसके बेटी के साथ जबरन बलात्कार किया। तभी उसकी मां मौके पर आ गई तो वहां से रामनारायण भाग गया। इस तहरीर पर पुलिस ने बलात्कार एवं पॉक्सो एक्ट में एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दिया। पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर पर्याप्त सबूत पाए जाने पर दोषी रामनारायण को दोषसिद्ध पाकर 20 वर्ष की कैद एवं ₹25000 अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई गई अवधि सजा में समाहित होगी। वहीं अर्थदंड की धनराशि पीड़िता को नियमानुसार मिलेगी। कोर्ट ने मामले के विवेचक इंस्पेक्टर रविंद्र भूषण मौर्य को पीड़िता की उम्र की सही जानकारी प्राप्त करने के लिए स्कूल से कोई जानकारी नहीं लेने को गम्भीरता से लेते हुए घोर लापरवाही मानते हुए विवेचक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ को भेजा है। अभियोजन पक्ष की तरफ से सरकारी अधिवक्ता दिनेश अग्रहरि एवं सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने बहस की।

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