Tuesday , October 4 2022

27% प्रतिशत ओबीसी आरक्षण में अन्य जाति को शामिल किए जाने का तेली महासभा ने किया विरोध

घनश्याम पाण्डेय/विनीत शर्मा (संवाददाता)

चोपन। पिछड़े वर्ग के 27% प्रतिशत आरक्षण में कायस्थ या अन्य समाज को शामिल करने की प्रदेश सरकार की मंशा को अखिल भारतीय तेली महासभा उत्तर प्रदेश ने पूरजोर विरोध किया है। तेली महासभा के जिलाध्यक्ष आशुतोष गुप्ता ने कहा कि पिछड़े वर्ग के 27% प्रतिशत आरक्षण का अधिकांश लाभ यादव कुर्मी व अन्य दो जातियों के लोगों ने ही उठाया है बाकी अन्य अति पिछड़ी जातियों के लोगों को आज तक उसका लाभ नहीं मिला है और नहीं दिया जाता है, पिछड़े वर्ग को कुछ देने के नाम पर कोई भी पार्टी या सरकार में सिर्फ दो ही जातियों के लोगों को समायोजित कर दिया जाता है और बाकी अन्य अति पिछड़ी जातियां ठगी सी ही रह जाती हैं। तेली,भुर्जी, चौरसिया, हलवाई, व सुनार आदि जैसी जातियों के लोगों को पहले भी उपेक्षित किया जाता रहा है और आज भी उपेक्षित किया जा रहा है। सभी पार्टियां व सरकार इन वर्गों के लोगों को संगठन व सरकार में भागीदारी नहीं दे रही हैं आज भी उपरोक्त अति पिछड़ा समाज सरकारी नौकरियों में न के बराबर है और शैक्षिक, आर्थिक व राजनैतिक रूप से काफ़ी पिछे हैं। सरकार व पार्टी द्वारा कायस्थ समाज को पिछड़ा वर्ग में शामिल किये जाने का शिगूफा छेड़कर कायस्थ वह अन्य पिछड़ा वर्गों के भाईचारे को तार-तार करना चाहती है। अभी तक आरक्षण का सारा लाभ यादव, कुर्मी ने उठाया है अब इनके बाद कायस्थ जैसे समाज को मिलेगा, बाकी अन्य अति पिछड़ा समाज पहले की तरह आगे भी झुनझुना ही हिलाता ‌रहेगा। आगे कहा कि कायस्थ समाज शैक्षिक, में 100% प्रतिशत, आर्थिक व नौकरियों में 90% प्रतिशत है और यह समाज काफी मजबूत है ऐसे में इस समाज को पिछड़ा वर्ग में शामिल कर अन्य पिछड़े वर्गों पर कुठारघात होगा और इससे साफ जाहिर होता है कि पार्टी या सरकार अन्य पिछड़े वर्गों के लोगों को न्याय व राजनैतिक हक देना ही नहीं चाहता है और इन जातियों के लोगों से सिर्फ वोट लेना चाहते हैं, लेकिन इनको भागीदारी देना नहीं चाहते पार्टियां चाहती हैं कि उपरोक्त अन्य पिछड़ा समाज दबा, कुचला व उपेक्षित ही बना रहे इन्हें ‌सिर्फ वोट लेने के लिए ही इस्तेमाल करते रहो और‌ स्वयं सत्ता का लाभ उठाते ‌रहो। गुप्ता ने ‌अन्य पिछड़े‌‌ वर्गों के सभी लोगों का आवाहन करते हुये कहा कि अपने हक़ के प्रति जागरूक ‌हों और‌ सामाजिक ‌न्याय की इस ‌लड़ाई व 27% प्रतिशत आरक्षण में पहले से ही ‌मजबूत अन्य समाज के लोगों को शामिल किये जाने का पूरजोर‌‌ विरोध करें।

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