Friday , October 7 2022

खाद के लिए सड़क पर उतरे किसान, पुलिस की मौजूदगी में बंटी यूरिया

धर्मेन्द्र गुप्ता(संवाददाता)

– डिमांड के अनुसार यूरिया की आपूर्ति नहीं होने से सैकड़ों किसानों को नहीं मिल सकी खाद

विंढमगंज। थाना क्षेत्र के महुली सहकारी समिति पर बुधवार को खाद लेने आए किसानों ने खाद नहीं मिलने पर जमकर हल्ला बोला।बुधवार को सुबह से ही महुली न्याय पंचायत क्षेत्र के सैकड़ों किसान खाद लेने के लिए समिति के सामने इकठ्ठा होना शुरू हो गए थे। करीब दस बजे सहकारी समिति महुली के सचिव परमेश्वर यादव के पहुंचने पर किसानों ने करीब दो घंटे बीत जाने के बाद भी खाद वितरण शुरू नहीं होने से हल्ला मचाना शुरू कर दिया। सहकारी समिति के सचिव परमेश्वर यादव ने बताया कि समिति में तीन सौ पचास बोरी यूरिया की खेप भेजी गई है।उन्होंने कहा कि इसमें नब्बे बोरी खाद किसानों को चेक पर दे दिए गए हैं।शेष दो सौ साठ बोरियों का वितरण बुधवार को होने की जानकारी मिलते ही समिति पर सुबह से ही सैकड़ों किसान इकठ्ठे हो गए।

लाइन में लगे किसानों ने बताया कि खाद के लिए पहले से जमा किए गए आधार कार्ड और खतौनी को कर्मियों ने वापस कर दिया और समिति का ताला बंद कर बाहर निकल गए।दो घंटे के बाद भी वितरण शुरू नहीं होने पर चिलचिलाती धूप में खड़े किसान हल्ला मचाते हुए सड़क पर आ गए और रींवा रांची राजमार्ग के दुद्धी विंढमगंज मार्ग पर करीब पंद्रह मिनट तक रफ्तनी ठप कर दी।सूचना पर पहुंची विंढमगंज पुलिस ने किसानों की समस्या सुनने के बाद उन्हें सड़क पर से हटाया और सचिव को बुलाकर बात की।सचिव ने कहा कि खाद लेने के लिए सैकड़ों किसान लाइन में खड़े हैं वहीं कई लोग दबाव बनाकर पहले खाद लेने के लिए कर्मियों से मारपीट पर उतारू हो जाते हैं।सचिव ने कहा कि सीमित मात्रा में उर्वरक की बोरियों को सभी किसानों को वितरित किया जाना संभव नहीं है।

बाद में विंढमगंज थानाध्यक्ष विनोद कुमार सोनकर ने मौके पर पहुंचकर स्थिति समझने के बाद प्रति ग्राम पंचायत वार निर्धारित 31 बोरियों का क्रमशः वितरण शुरू कराया।थानाध्यक्ष ने कहा कि खाद वितरित नहीं होने से नाराज किसान समिति के सामने शोर शराबा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सड़क जाम करने जैसी कोई बात नहीं है।इधर समिति से बिना खाद लिए सैकड़ों किसानों को वापस वापस हो जाना पड़ा।खाद न मिल पाने से मायूस किसानों ने सरकार को भी खूब खरी खोटी सुनाई और आवश्यकता के मुताबिक काफी कम मात्रा में खाद की आपूर्ति किए जाने को किसानों के लिए इसे ऊंट के मुंह में जीरा बताया।राजकुमार कुशवाहा, रामज्ञान,अवधेश कुमार, राम प्यारे भुइयां, महेंद्र यादव, रामनाथ, मनरुप आदि सैकड़ों किसान बिना खाद लिए वापस लौट गए।

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