कोविड वैक्सिनेशन को लेकर ऐसी लापरवाही जो कभी माफ नहीं किया जा सकता

संजय केसरी/ अर्जुन मौर्या/ आनंद चौबे (संवाददाता)

– आज से जिले में शुरू हो रहा है रोजाना के लक्षित लक्ष्य से तीन गुना टीकाकरण की व्यवस्था

– जिलाधिकारी ने कल ही लोगों से टीकाकरण के लिए की थी अपील

– लेकिन क्या इस बड़ी लापरवाही पर जिलाधिकारी लेंगे एक्शन

– आखिर आदिवासियों की इस दशा के लिए कौन जिम्मेदार

– जिले में दो दलित आदिवासी विधायकों के रहते आदिवासी इलाकों में बड़ी लापरवाही

डाला/सोनभद्र । कोरोना वैक्सीन को लेकर सरकार से लेकर जिले के अफसर भले ही आंकड़ों की बाजीगरी दिखा रहे हों मगर आज हम आपको जो खबर दिखाने जा रहे हैं वह न सिर्फ जिला प्रशासन को बल्कि योगी सरकार को हैरान व परेशान कर सकती है।

मामला जनपद सोनभद्र से जुड़ा हुआ है । चोपन ब्लाक का गुरमुरा इलाका काफी पिछड़ा व आदिवासी बाहुल्य माना जाता है।

शुरुआत में कोविड वैक्सीन को लेकर आदिवासी बेहद डरे व सहमे हुए थे। लेकिन काफी समझाने-बुझाने के बाद वे स्थानीय अस्पताल में वैक्सीन लगाने को तैयार हुए ।
जिसके बाद मार्च में कैम्प के माध्यम से गुरमुरा अस्पताल पर लगभग 900 लोगों का टीकाकरण कराया गया । गुरमुरा अस्पताल के फार्मासिस्ट ने बताया कि दूसरे कैम्प के लिए कोई अफेश नहीं आया है, आते ही टीकाकरण करवाया जाएगा ।

पहले कैम्प लगे लगभग चार महीने से अधिक का समय बीत गया दूसरी डोज के लिए दोबारा गुरमुरा में कैम्प नहीं लगा । जिसका नतीजा यह रहा कि आज भी क्षेत्र के आदिवासी ग्रामीण दूसरी डोज के इंतजार में प्रशासन की राह देख रहे हैं ।

तय समय सीमा में लगने वाले कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज पर जब हमने स्वास्थ्य विभाग के डा0 रामकुंवर से बात किया तो पहले तो वे खुद की लापरवाही मानने को तैयार नहीं हैं । लेकिन उन्होंने यब जरूर माना कि इतना लंबा अंतराल के बाद पहले डोज का कोई मतलब नहीं रह गया ।

वहीं विपक्ष इतनी बड़ी लापरवाही के लिए सरकार को ही दोषी ठहरा रही है । सपा के पूर्व विधायक रमेश दुबे कहना है कि सरकार केवल झूठी रिपोर्ट तैयार कर वाहवाही लूटने का काम कर रही है और लोगों की जिंदगी के साथ खेल रही है ।

बहरहाल टीकाकरण शार्टेज को लेकर अक्सर खबर आती रही है। लेकिन लोगों को पहली डोज लगवाकर छोड़ दिये जाने का यह पहला मामला सामने आया है।

अब सवाल यह उठता है कि यदि प्रशासन कैम्प का आयोजन लोगों को सुविधा देने के लिए लगाया था तो दूसरी डोज के लिए यह सुविधा उनसे क्यों छीन लिया गया।
अब देखना है कि गरीब आदिवासियों के साथ हुई इस गड़बड़ी के लिए सरकार क्या एक्शन लेती है ।

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