आयोग को नहीं मिला चुनाव में खर्च का ब्योरा, प्रधानों व सदस्यों की जमानत होगी जब्त

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के बाद ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों का शपथ ग्रहण भी हो चुका है। इसके बाद भी अभी तक एक भी प्रत्याशी ने आयोग को चुनाव में खर्च हुई रकम का ब्योरा नहीं दिया है। निर्वाचन आयोग के नियमानुसार चुनाव में खर्च रकम का लेखाजोखा जमा न करने वाले प्रत्याशियों की जमानत राशि भी वापस नहीं होगी।

बताते चलें कि जिले में पंचायत चुनावों के लिए 29 अप्रैल को मतदान कराया गया। दो मई को मतगणना हुई। इसके बाद अब ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों का गठन भी हो चुका है। चुनाव होने के तीन महीने बाद तक का समय प्रत्याशियों को चुनाव खर्च जमा कराना होता है।

ग्राम प्रधान, सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्य अपना खर्चा संबंधित तहसील पर और जिला पंचायत सदस्य अपना चुनावी खर्च कोषाधिकारी के पास जमा करते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी पदों के लिए चुुनावी खर्च की सीमा तय कर दी है। जिसके अनुसार ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य को 75-75 हजार, जिला पंचायत सदस्य को 1.5 लाख और ग्राम पंचायत सदस्यों केे 10 हजार रुपये खर्च करने का अधिकार होता है।

जिले में 31 जिला पंचायत सदस्यों, 781 क्षेत्र पंचायतें, 629 ग्राम पंचायतें हैं। इस प्रकार इन सभी पदों चुनाव लड़ने वाले प्रत्यशियों द्वारा बतौर जमानत राशि लाखों रुपये की धनराशि राजकीय कोष में जमा कराई गई हैं। यदि प्रत्याशी चुनावी खर्च जमा कर देते हैं तो उनकी जमानत राशि वापस हो सकती है। परंतु चुुनाव होने के बाद अब कोई खर्च का ब्योरा करने के झंझट में नहीं पड़ना चाहता।

इस संबंध में सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी जगरूप पटेल ने बताया कि “अभी तक किसी प्रत्याशी ने चुनाव में किए गए खर्च का ब्योरा जमा नहीं कराया है और ना ही किसी ने जमानत राशि वापस लेने के लिए ही आवेदन किया है। समय सीमा के अंदर खर्च का ब्योरा जमा न करने वाले प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त कर ली जाएगी।”

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