असम-मिजोरम सीमा विवाद पर असम सरकार ने जारी की एडवाइजरी

फाइल फोटो

असम-मिजोरम की सीमा पर पिछले दिनों हुई झड़प के बाद अब असम सरकार ने एडवाइजरी जारी कर अपने लोगों को मिजोरम नहीं जाने की सलाह दी है । साथ ही मिजोरम में रह रहे लोगों और इमरजेंसी में जाने वाले लोगों से सावधान रहने के लिए कहा ।

एडवाइजरी में हिंसा की घटना का जिक्र करते हुए कहा गया है, ”इस घटना के बाद भी, कुछ मिज़ो सिविल सोसाइटी, छात्र और युवा संगठन लगातार असम राज्य और उसके लोगों के खिलाफ भड़काऊ बयान जारी कर रहे हैं । असम पुलिस के पास उपलब्ध वीडियो फुटेज से यह पता चला है कि कई नागरिक स्वचालित हथियारों आदि से लैस हैं । इन्हें कारणों से ट्रेवल एडवाइजरी जारी किया गया है ।”

बता दें कि विवाद के बीच मिजोरम पुलिस ने असम के अधिकारियों की एक टीम पर सोमवार को गोलीबारी कर दी थी जिसमें में असम पुलिस के पांच कर्मियों और एक नागरिक की मौत हो गई थी । एक पुलिस अधीक्षक सहित 50 से अधिक अन्य लोग जख्मी हो गए थे ।

इस हिंसा के बाद बुधवार को मिजोरम और असम के अधिकारियों के साथ केंद्रीय गृहमंत्रालय ने करीब दो घंटे तक बैठक की । इस बैठक में दोनों राज्य सरकारों ने राष्ट्रीय राजमार्ग 306 पर अशांत अंतरराज्यीय सीमा पर तटस्थ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की तैनाती के लिए सहमति जताई ।

असम के बराक घाटी के जिले कछार, करीमगंज और हैलाकांडी की मिजोरम के तीन जिलों आइजोल, कोलासिब और मामित के साथ 164 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आठ पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत की थी और सीमा विवादों को सुलझाने की जरूरत को रेखांकित किया था, जिसके दो दिन बाद यह घटना हुई थी।

कछार जिले के एक अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि असम-मिजोरम सीमा पर अब ‘स्थिति शांत एवं नियंत्रण’ में है। दोनों राज्यों के बीच सीमा पर लैलापुर में केंद्रीय बल मौजूद हैं और राज्य पुलिस के कर्मी अपने-अपने सीमा क्षेत्रों में 100 मीटर पीछे तैनात हैं ।

मिजोरम के उपमुख्यंत्री तावनलुइया ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी सरकार इस दावे पर किसी भी मुकदमे का सामना करने को तैयार है कि उसने पड़ोसी राज्य असम के क्षेत्र में अतिक्रमण किया । उपमुख्यमंत्री का बयान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के ‘अतिक्रमण संबंधी’ आरोपों को खारिज करने के रूप में आया है । सरमा ने मंगलवार को कहा था कि उनकी सरकार इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय जाएगी ।

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