सांसद द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप पर चुप्पी साधे रहे सीएमओ, नहीं दिया कोई जबाब

जनपद न्यूज ब्यूरो

स्वास्थ्य महकमे में भ्रष्टाचार का अंबार, नहीं लग पा रही लगाम

● डीडीटी की एक्सपायरी बोरी मिलने के बावजूद ठंडे बस्ते में डाल दिया गया जांच

● जिले में अवैध क्लिनिक के नाम पर चल रहा लम्बा खेल

● सीएमओ कार्यालय में पकड़ा गया था फर्जी कर्मी, अब तक नहीं हुई कोई कार्यवाही

● कोविड काल में चहेतों को बिठाकर वेतन देने का भी लगा था आरोप

● कुछ ही स्वास्थ्य कर्मियों व चिकित्सकों से कराई गई ड्यूटी

● कई इलाकों में अस्पताल की बिल्डिंग बनकर तैयार मगर इच्छा शक्ति की कमी के कारण फांक रहे धूल

सोनभद्र । सांसद द्वारा पत्र लिखकर सीएमओ डॉ0 नेम सिंह पर जिस तरह से भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है उस पर सीएमओ ने कोई जबाब तक नहीं दिया और चलते बने। जब उनसे पूछा गया कि आखिर जिस भ्रष्टाचार का जिक्र सांसद ने अपने पत्र में किया है, उसमें कितनी सच्चाई है तो सीएमओ ने चुप्पी साध ली। हाल के दिनों में डीडीटी पाउडर की खेप पड़के जाने व जांच में पुष्ट होने के बावजूद अब तक कोई कार्यवाही न किये जाने कारण पूछा गया तो भी सीएमओ चुप नजर आए। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि क्या वे सांसद के खिलाफ नहीं जाना चाहते या फिर सांसद के शिकायत का उनके पास कोई जबाब नहीं है।

ऐसा नहीं है कि सांसद ने ही सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की पोल खोली है। इसके पहले भी मीडिया कर्मियों ने भी कई बार कमियां पकड़ी व गिनाई लेकिन सीएमओ हर बार या तो सवाल टाल गए या फिर कोई कार्यवाही तक नहीं की।

जिले में जिस तरह से क्लिनिक चलाने वालों का शोषण हो रहा है और गाली-गलौज तक किया जाता है, वह भी सीएमओ के जानकारी में है, शिकायत व सबूत देने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई ।

सीएमओ कार्यालय में स्टिंग ऑपरेशन के दौरान एक बाहरी व्यक्ति विभाग के कम्प्यूटर पर बैठकर काम करता हुआ पाया गया, सीएमओ ने कार्यवाही का आश्वासन दिया लेकिन बाद में मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जबकि ऐसी लापरवाही के कारण ही कुछ महीने पूर्व साइबर हैकरों ने 92 लाख रुपये उड़ाने में कामयाब हो गए जिसकी जाँच अब भी साइबर सेल मिर्जापुर द्वारा की जा रही है।

इतना ही नहीं कोविड काल में जिस तरह से कुछ ही स्टाफों से ड्यूटी ली गयी और बाकी अपने चहेतों को घर बैठकर तनख्वा दी गई वह भी मामला किसी से छिपा नहीं है।

सरकार भले ही हर जिले में मेडिकल कालेज खोल रही है और स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ाने का दावा कर रही हो मगर आज भी जिले में दूरदराज के कई इलाके ऐसे हैं जहां अस्पताल की बिल्डिंग बनकर तैयार है लेकिन या तो उद्घाटन नहीं हुआ या फिर ताले नहीं खुले जबकि कई अस्पताल तो कागजों पर दौड़ रहे हैं। जिनका जिक्र पूर्व में हुई अपनी जांच में डिप्टी सीएमओ डॉ0 बी0के0 अग्रवाल ने किया था।

तमाम दुर्व्यवस्थाओं के बावजूद सीएमओ की यह चुप्पी यदि यह साबित करने में लगी है कि सब कुछ ठीकठाक है और वे ऐसे ही विकास की गंगा बहाते रहेंगे। मगर उनको यह समझना होगा कि यदि समय रहते भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगा सके तो कभी भी मामला बड़ा हो सकता है।

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