जिलाधिकारी की अध्यक्षता में “भूजल सप्ताह” गोष्ठी कार्यक्रम सम्पन्न

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । “खुशहाल भविष्य के लिए भू-जल बचाएं” “रोजमर्रा के घरेलू कार्यों में जल बचत करें, भावी पीढ़ी के लिए भू-जल को संजोकर रखें”। क्या होगा कल, अगर नहीं बचायेंगे, वर्षा जल। हकीकत में जल ही जीवन है, “जल बचाओं-जीवन बचाओं” को आत्मसात करें, लिहाजा वर्षा के पानी को ज्यादा से ज्यादा संरक्षित किया जाय।

उक्त बातेंं जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने “भू-जल सप्ताह” अभियान 16 से 22 जुलाई, 2021 के सम्पन्न होने पर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित “भूजल सप्ताह” गोष्ठी कार्यक्रम समारोह को सम्बोधित करते हुए कहीं। जल का महत्व तथा कृषि उत्पादन व उद्योगों में जल की उपयोगिता सर्वविदित है। जल का अविवेकपूर्ण एवं असंयमित उपयोग भयावह स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। भूगर्भ जल के महत्व के प्रति आमजन मानस को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष 16 जुलाई से 22 जुलाई तक जल सप्ताह के रूप में मनाये जाने का निर्णय शासनादेशानुसार निर्धारित है। इस वर्ष भी 16 जुलाई 2021 से 22 जुलाई 2021 के मध्य भूजल सप्ताह मनाया गया।

अधिशासी अभियन्ता लघु सिंचाई संजय कुमार शर्मा द्वारा गोष्ठी का शुभारम्भ करते हुए इस वर्ष के मुख्य विचार विन्दु जल संरक्षण एक संकल्प, नहीं है इसका कोई विकल्प” से अवगत कराया गया एवं वर्षा जल संचयन के विभिन्न उपाय यथा चेकडैम निर्माण, बन्धी, तालाब जीणोद्वार, खेतो के मेढ़ बन्धी निर्माण हेतु विस्तृत चर्चा की गयी एवं जल संरक्षण के महत्व के संबंध में बताया गया।

इस मौके पर अपर जिलाधिकारी नमांमि गंगे, जिला विकास अधिकारी राम बाबू त्रिपाठी, उप निदेशक (कृषि), जिला उद्यान अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा जल संचयन के लिए अपने-अपने विचार व्यक्त किये गये।

संयुक्त रूप से उन्होंने जानकारी बताया कि पानी को संरक्षित हेतु फसलो के चयन में फसल चक्र में सावधानी वरतते हुए कम जल उपयोग वाले फसलों के चयन करने के विषय मे बताया गया।

“हर खेत का पानी खेत में, हर गावं का पानी गांव” मेढ़ बन्धी, फसलो की सिचाई स्प्रिंकलर आदि से किये जाने पर जोर दिया गया एवं विगत वर्षो में भूजल रिचार्ज बढ़ाने के लिए किये गये प्रयासों के सकारात्मक परिणाम के संबंध में अवगत कराया गया। प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना में सीधे स्प्रिंकलर लाभार्थियों को उपलब्ध कराया गया है जिससे सब्जी, बागवानी, वृक्षारोपण से वर्षा जल संरक्षण किये जाने हेतु विभागीय कार्यो के सम्बन्ध में अवगत कराया गया एवं जल संग्रहण के विभिन्न उपायों के संबंध में विचार प्रकट किया गया। 400 से 500 ग्राम पंचायतों में गर्मी के दिनों में पानी की परेशानी होती थी क्योकि गर्मी के दिनों में हैण्ड पम्प सूख जाते थे, गत वर्षो में जल संरक्षण के कारण वर्तमान में रिचार्ज की स्थिति संतोषजनक है तथा हैण्ड पम्प के पास पिट का निर्माण किये जाने पर कार्यवाही किये जाने के विषय में अवगत कराया। द्वारा पानी के बिना पृथ्वी पर कोई भी जीव जन्तु जीवित नहीं रह सकता है। पूर्व में ग्राम पंचायतों मे टैकरों द्वारा पानी की सप्लाई होती थी जिस पर काफी मात्रा में धनराशि व्यय होती थी। पूर्व के वर्षो में 1000 तालाब, 500 तालाब एवं बेलन नदी का जीर्णोद्वार मनरेगा के अन्तर्गत कार्य कराया गया है। जिससे भूजल स्तर में काफी वृद्वि हुई है। विगत वर्षो में भूजल रिचार्ज बढ़ाने के लिए किये गये प्रयासों के सकारात्मक परिणाम के संबंध में अवगत कराया गया। जल के संरक्षण के संबंध में बताया गया कि अपने जीवन में सुबह उठने से सोने तक पानी का उपयोग करते है। बूॅद बूॅद से घड़ा भरता है। एक एक बूदॅ पानी को बर्वाद न होने दिया जाय। “जल बचायें जीवन बचाये” साथ ही बुन्देलखण्ड एवं विन्ध्याचल मण्डल में हर घर नल योजना पाइप लाइन के संबंध में भी अवगत कराया गया।

जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि भूजल रिचार्ज बढ़ाने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित, तालाब जीर्णोद्वार, प्रधानमंत्री आवास के लाभार्थियों के छत का पानी रोकने हेतु सोक पिट निर्माण एवं हैण्डपम्प के पास रिचार्ज पिट बनवाने हेतु निर्देशित किया गया। जिलाधिकारी द्वारा अधिकारियों को मनरेगा एवं राज्य वित्त से भूजल संरक्षण हेतु कार्य कराने के भी निर्देश दिये गये। जिलाधिकारी द्वारा भूजल रिचार्ज बढ़ाने के लिए तालाब, सिचाई कूप निर्माण/जीर्णोद्वार, चेकडैम, बन्धी आदि के निर्माण पर जोर देते हुए वर्षा जल संरक्षण हेतु प्रेरित किया गया।

जिलाधिकारी अभिषेक सिंह, मुख्य विकास अधिकारी डॉ0 अमित पाल शर्मा व अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे ने संयुक्त रूप से कहा कि सरकारी मशीनरी के लोग पूरी तत्परता के साथ जल संरक्षण के लिए कोशिश करते हुए ज्यादा से ज्यादा जल संरक्षित करें। उन्होंने कहा कि जनपद के नागरिक वर्षा के हर बूंद को संरक्षित करके जिले के सभी क्षेत्र को सालों साल सिचाई/दैनिक उपयोग के साथ ही शुद्ध पेयजल हेतु आत्म निर्भर करें, सरकारी मशानरी के साथ ही आम नागरिक में इच्छाशक्ति पैदा करने की ज़रूरत है, ताकि जल स्रोतों को मजबूत करते हुए वर्षा जल को प्यार के साथ संरक्षित किया जाय।

जिलाधिकारी ने बताया कि हमारे जीवन के दैनिक उपयोग के लिए जो जल प्रयोग करते हैं, उनमें छोटी-छोटी सावधानियां न बरतने की वजह से पानी बेवजह बर्बाद होता रहता है, जैसे-नल पर नहाने, मुंह हाथ धोने आदि कार्य करते समय टोटी को लगातार खोले रहने से पानी बर्बाद हो जाता है, जिसे सावधानियां बरतकर पानी का संचयन काफी हद तक किया जा सकता है। इस तरह के जल संचयन के लिए ग्रामीण व शहरी इलाकों के नागरिकों में इसके प्रति जागरूकता फैलाने की जरूरत है। जल संचयन वास्तव में एक पुनीत कार्य है। इस मौके पर शुद्ध जल को संरक्षित करने की आवश्यकता, जल संरक्षण के लाभ, घर में जल संरक्षण के उपाय, घर से बाहर जल संरक्षण के उपाय, सार्वनिक स्थानां पर जल संरक्षण के उपाय, सोसायटी में जल संरक्षण के उपाय आदि बिन्दुओं पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला गया।

भू-जल गोष्ठी में गोष्ठी जिलाधिकारी अभिषेक सिंह, मुख्य विकास अधिकारी डॉ0 अमित पाल शर्मा व अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे, जिला विकास अधिकारी शरामबाबू त्रिपाठी, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 नेम सिंह, उप निदेशक कृषि, जिला पंचायत राज अधिकारी विशाल सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी अजीत सिंह सहित अन्य सम्बन्धितगण व जिला स्तरीय अधिकारी, खण्ड विकास अधिकारीगण मौजूद रहे।



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