व्यक्ति को आत्म चिंतन करना जरूरी -सुन्दरराज महाराज

अनीता अग्रहरि (संवाददाता)

धीना। चिरईगांव में ग्रामीणों के सहयोग से चातुर्मास यज्ञ के पन्द्रहवें दिन बुधवार को त्रिदंडी स्वामी के शिष्य सुन्दरदास महाराज ने श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराया।कथा में व्यक्ति को आत्म चिंतन के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा किया।पंडाल में कथा सुनकर उपस्थित ग्रामीण भक्ति से भाव विभोर हो गए।
त्रिदंडी स्वामी के शिष्य सुन्दरराज महाराज ने कहा कि व्यक्ति को आत्म चिंतन करना बहुत जरूरी है।क्योंकि जो चिंता नहीं करता है उसका मानसिक संतुलन खराब यानि पागल की श्रेणी में आता है।इसलिए कहा जाता है कि व्यक्ति को चिंतन करना चाहिए।संत, गृहस्थ, देवता सबकी चिंता अलग अलग होती है।संत को धर्म की , गृहस्थ को परिवार चलाने की, देवता को अपने भक्त की चिंता लगी रहती है।जैसे कृष्ण, राम, शिवजी आदि देवता ने अपने भक्तों को दर्शन देकर उनकी कष्टों को दूर करने का काम किया।कृष्ण ने महाभारत के युद्ध मे अर्जुन को समझाया क्योंकि उन्हें अर्जुन की चिंता थी।गृहस्थ अपने सगे सम्बन्धियों की चिंता करते है।लेकिन सभी लोगों को भगवान के द्वारा चिंता दिया जाता है।यदि धर्म की रक्षा शास्त्र से न हो तो शस्त्र से करना चाहिए।क्योंकि नारायण के एक हाथ मे शास्त्र व दूसरे हाथ में शस्त्र होता है।कथा का रसपान करने वालों में मृत्युंजय सिंह नागवंशी, वीर प्रताप सिंह, विंध्याचल सिंह, शिवबच्चन सिंह, चन्द्रकेतु सिंह, कुंदन सिंह, सरिता सिंह आदि रहे।

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