जिपं अध्यक्ष के नाम पर सस्पेंस बरकरार, बीजेपी के कई नेता अपना दल के सम्पर्क में- सूत्र

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

शीर्ष नेतृत्व के फैसले से बीजेपी नेता मायूस व नाराज

● बीजेपी खेमे में चर्चा, यदि फैसला एनडीए को करना था तो पंचायत चुनाव अलग-अलग क्यों लड़ाया

● सोनभद्र में अपना दल (एस0) ने जमा ली अपनी मजबूत जड़ें

सोनभद्र । जिले में आज जिस तरह से राजनीतिक घटनाक्रम बदला, इसकी उम्मीद शायद ही जिले के धुरंधर नेता कभी लगाए होंगे। जैसे ही यह खबर मीडिया में आने लगी कि सोनभद्र जिला पंचायत के अध्यक्ष की सीट एनडीए के घटक दल अपना दल (एस0) के खाते में जा रही है, बीजेपी खेमे में हड़कम्प मच गया। बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता पार्टी की मजबूत दावेदार माने जाने वाली प्रत्याशी रितु सिंह के कार्यालय पहुंच गए। किसी को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि वे करें तो क्या करें। अब तक भाजपा की तरफ से जिस तरह के संकेत मिल रहे थे उस हिसाब से रितु सिंह का टिकट लगभग फाइनल माना जा रहा था, तभी तो रितु सिंह ने चार सेटों में पर्चा भी खरीद लिया था। लेकिन आज जिस तरह से समीकरण बदला उससे एक बात तो साफ हो गया कि सोनभद्र में अपना दल (एस0) ने अपनी जड़ें बेहद मजबूत कर ली हैं।

उधर खबर मिलते ही अपना दल (एस0) कार्यालय में भी हलचल तेज हो गयी और बैठक का दौर भी शुरू हो गया। बैठक के बाद चार नामों पर सहमति बनी और शीर्ष नेतृत्व को चारों नाम भेज दिये गए। जिसमें प्रमुख रूप से मोहन कुशवाहा का नाम चर्चा में इसलिए है क्योंकि पार्टी से बगावत कर चुनाव लड़ने की वजह से उन्हें निष्काषित किया गया था। हालांकि आज ही मोहन कुशवाहा ने अपना दल (एस0) का दामन थामा है।

हालांकि अभी भी ऊपर एनडीए की बैठक में मंथन चल रहा है। सभी पहलुओं पर गहराई से मंथन किया जा रहा है। वहीं सूत्रों की माने तो ऊपर भेजे गए चारों नामों से शीर्ष नेतृत्व संतुष्ट नहीं है। सूत्रों की माने तो घटनाक्रम बदला तो बीजेपी खेमे से कई लोग अपना दल (एस0) के सम्पर्क में आने लगे हैं। सूत्र की माने तो अध्यक्ष पद के लिए फिर चौंकाने वाले ट्विस्ट आ सकते हैं तभी तो कहा जा रहा है कि आज की रात बेहद अहम है।

अध्यक्ष का नाम एनडीए की बैठक में ही फाइनल होना है लेकिन उन्हें ऐसा चेहरा चाहिए जो सभी तरीके से मजबूती से लड़े। बीजेपी भी समझ रही है कि वह बहुत बड़ा रिस्क गेम खेल रही है। अपनों को नाराज कर यदि वह अपना दल (एस0) के साथ है तो सीट हर हाल में निकली चाहिए, वरना वह न घर की रहेगी और न समाज के।

बड़ा सवाल यह है कि यदि दोनों पार्टी को बाद में एक होकर अध्यक्ष चुनना था तो पंचायत चुनाव में अलग-अलग लड़ने की जरूरत क्या थी? क्या भाजपा का यह समझौता 2022 विधानसभा के गठबंधन को दर्शाता है, क्योंकि जिस तरह से अपना दल (एस0) बीजेपी से नाराज चलने की खबर आ रही थी तो क्या माना जाय कि यह समझौता उसी नाराजगी को खत्म करने की कोशिश है। बहरहाल आज रात स्थानीय नेताओं के लिए बेहद अहम है। उम्मीद है कि आज रात एनडीए अपना अध्यक्ष पद का उम्मीदवार घोषित कर देगा।



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