तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला, विधानसभा के आगामी बजट सत्र में कृषि कानून एवं सीएए के विरूद्ध कराएंगे प्रस्ताव पारित

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रूप में एमके स्टालिन को शपथ लिए 50 दिन भी पूरे नहीं हुए हैं लेकिन एक के बाद के विवादित फैसले लिए जा रहे हैं। हाल में भी मंदिरों में गैर ब्राह्मणों की नियुक्ति के लिए एक कोर्स शुरू करने तथा तमिलनाडु हिंदू रिलिजियस एंड चैरिटेबल एंडोमेंट डिपार्टमेंट के अधीन आने वाले 36000 मंदिरों में उनकी नियुक्ति की घोषणा की गई है। अब इसके बाद मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की नेतृत्व वाली डीएमके सरकार ने एक और बड़ा फैसला किया है।

दरअसल, विधानसभा के आगामी बजट सत्र में केंद्र के कृषि कानून एवं संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के विरूद्ध प्रस्ताव पारित किये जाएंगे। इस विषय पर सदन में अपनी बात रख रहे द्रमुक के सदस्य तमिलझारसी के बीच में दखल देते हुए स्टालिन ने कहा कि केंद्र ने जब ये तीनों कृषि कानून बनाए तब से ही द्रमुक ने उन्हें वापस लेने की मांग की है क्योंकि ये किसानों के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि (उनकी) सरकार इन तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित करने का अपना निर्णय स्पष्ट कर चुकी है और इसमें कोईबदलाव नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि चूंकि द्रमुक के सत्ता संभालने के बाद यह पहला सत्र है और जब राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस चल रही है तब ऐसे प्रस्ताव स्वीकार करना उपयुक्त नहीं होगा। स्टालिन ने कहा कि इसी प्रकार, चूंकि सीएए ने ‘‘देशभर के अल्पसंख्यक समुदायों के हितों को प्रभावित किया है और उनके बीच डर फैल गया है’’ इसलिए केंद्र से इस संशोधित नागरिकता कानून को भी वापस लेने की मांग करते हुए बजट सत्र में एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा।



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