शर्मनाक: पैसे के अभाव में रास्ते में घंटों पड़ा रहा मजदूर का शव, लोगों ने चंदा कर किया अंतिम संस्कार

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

● खेखड़ा गांव निवासी मजदूर अनिल कुमार की गुरूवार को हो गई थी मौत

अंतिम संस्कार के लिए ग्राम पंचायत की तरफ से नहीं दी गयी आर्थिक सहायता

ग्राम प्रधान ने 500 रुपये देकर अपना पल्ला झाड़ा

● नया राशन कार्ड बनाने के नाम पर कोटेदार ने अपने पास रखा है पुराना राशन कार्ड

सोनभद्र । कोरोना काल में जहाँ प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक निर्धन और निराश्रित परिवारों में भुखमरी की दशा, बीमारी एवं मृत्यु होने पर दाह संस्कार करने के लिए तत्काल संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा पीड़ित परिवार को 5000 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने की घोषणा की है। लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है। ताजा मामला रॉबर्ट्सगंज थाना क्षेत्र के खेखड़ा गांव का है जहाँ पैसे के अभाव में एक मजदूर का शव रास्ते में घंटों पड़ा रहा लेकिन सूचना देने के बाद भी जिला प्रशासन का कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। बाद में लोगों ने चंदा इकट्ठा कर मजदूर के शव का दाह संस्कार किया। चोपन नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि उष्मान अली ने आगे बढ़कर सहयोग किया।

रॉबर्ट्सगंज विकास खंड के ग्राम पंचायत मंगुराही के खेखड़ा गांव निवासी अनिल कुमार की तबीयत बृहस्पतिवार को भोर में अचानक खराब हो गई थी। परिजनों ने उन्हें लोढ़ी स्थित जिला संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया था, जहां दोपहर बाद करीब एक बजे उनकी मौत हो गई। परिजन उनके शव को लेकर गांव आ गए लेकिन पैसे के अभाव में उनका दाह संस्कार नहीं कर सके। शव रास्ते में घंटों पड़ा रहा। शव के पास उनकी पत्नी और बच्चे रोते रहे। धीरे-धीरे इसकी सूचना ग्राम पंचायत बहुअरा के ग्रामीणों को हुई। सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को दिया गया। लेकिन कहीं से कोई सहयोग प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद ग्रामीणों ने अनिल कुमार के शव का दाह संस्कार करने के लिए चंदा इकट्ठा किया। हालांकि समाजसेवी उस्मान अली और ग्रामीणों की मदद से करीब 6500 रुपये इकट्ठा किए। जबकि मौके पर मौजूद मंगुराही के ग्राम प्रधान रमेश यादव उर्फ हड़बड़ी प्रधान ने चंदे के रूप में केवल 500 रुपये की मदद की। जिसके बाद हिन्दुवारी स्थित श्मशान घाट पर मृतक अनिल कुमार का दाह संस्कार किया। दाह संस्कार के बाद ग्रामीणों ने बची हुई धनराशि उनकी पत्नी चंद्रावती को दे दी।

पूरे मामले पर डीपीआरओ विशाल सिंह ने बताया कि “मामला संज्ञान में नहीं है, पूरे मामले की जाँच की जाएगी।”

दो महीने से नहीं मिला है राशन

मृतक अनिल कुमार बियार समुदाय से हैं और मजदूरी कर अपना और अपने परिवार का खर्च चलाते थे। उनकी पत्नी चंद्रावती ने बताया कि वे पिछले एक साल से बीमार चल रहे थे। पूरी कमाई दवा में ही खर्च हो जाती थी। इलाज के लिए डेढ़ बिस्वा जमीन भी बेचनी पड़ी थी। बृहस्पतिवार की भोर में अचानक उनकी सांसें फूलने लगी। हम लोगों ने उन्हें लोढ़ी स्थित जिला चिकिस्तालय में भर्ती कराया जहां दोपहर बाद एक बजे उनकी मौत हो गई। मृतक अनिल कुमार के परिवार में उनकी पत्नी चंद्रावती के अलावा उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है। परिवार के पास केवल पांच बिस्वा के करीब जमीन बची है जिसमें एक कच्चा मकान बना है और पूरा परिवार उसी में रहता है। मृतक की पत्नी ने बताया कि उन्हें कोटेदार द्वारा पिछले दो महीने से राशन भी नहीं दिया जा रहा है।

पूरे मामले पर जिला पूर्ति अधिकारी डॉ0 राकेश तिवारी ने कहा कि “परिवार का यदि राशन कार्ड बना है तो उन्हें राशन अवश्य मिलेगा। पुरे प्रकरण की जाँच की जाएगी।”



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