जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव का शेड्यूल जारी, सपा-भाजपा की रहेगी टक्कर

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की तारीख तय कर दी गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के लिए शेड्यूल जारी कर दिया है। कि26 जून प्रत्याशियों के लिए नामांकन होगा, उसी दिन शाम 3 बजे तक नामांकन पत्रों की जांच होगी तथा 29 जून तक प्रत्याशी नाम वापस ले सकेंगे। 3 जुलाई को जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए मतदान होगा तथा उसी दिन 3 बजे से मतगणना होगी।

इसके साथ ही राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी आमने-सामने के मुकाबले में हैं। हालांकि, दोनों ही दल जिले में बहुमत के आंकड़े से दूर हैं और निर्दलियों के सहारे जंग जीतने की कोशिश में जुटे हुए हैं।
जिले में जिला पंचायत के 31 सदस्य हैं। ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर पहुंचने के लिए 16 सदस्यों का जादुई आँकड़ा हासिल करना बेहद जरूरी है। लेकिन, चुनाव परिणामों ने किसी भी दल को स्पष्ट संदेश नहीं दिया है। सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर सामने आई भाजपा भी सिर्फ छः सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी है। वहीं, समाजवादी पार्टी 11 सीटों पर विजय पताका फहराने में कामयाबी हासिल हुई है।

सपा की ओर से जहाँ अनिल यादव और जय प्रकाश पांडेय उर्फ चेखुर पांडेय के नाम की चर्चा है तो वहीं भाजपा से रितु सिंह, उत्तरा त्रिपाठी और मुनिया देवी के नाम की चर्चा चल रही है।

भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत चौबे ने कहा कि “अभी किसी नाम पर फाइनल नहीं हुआ है। पार्टी से जुड़े 6 सदस्य जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते हैं। इसके अलावा और भी जिला पंचायत सदस्य संपर्क में हैं। जिनकी मदद से भाजपा जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर अपने प्रत्याशी को बैठाएगी।”

सपा जिलाध्यक्ष विजय यादव ने कहा कि “अभी किसी भी प्रत्याशी का नाम फाइनल नहीं किया गया है। प्रदेश स्तर से ही प्रत्याशी की घोषणा जल्दी ही की जाएगी। वैसे जिला पंचायत के सदस्यों में पार्टी की मजबूत स्थिति है। तकरीबन 11 सदस्य हम लोगों के साथ हैं। इसके अलावा निर्दलिय सदस्य भी हमारे संपर्क में हैं। इस नाते इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर सपा का ही प्रत्याशी होगा।”

चुनाव में भाजपा और सपा दोनों ही दल अपने प्रत्याशी उतारने जा रही हैं। लेकिन, पूर्ण बहुमत दोनों के पास नहीं है। ऐसे में दोनों दलों की निर्दलियों पर जमी हुईं हैं। जीत के लिए भाजपा को जहाँ 11 सदस्यों के समर्थन की दरकार है, तो वहीं सपा को छः सदस्यों को अपने पक्ष में लाना होगा। हालांकि, सपा का दावा है निर्दलियों सदस्यों में एक उनकी ही पार्टी के हैं, ये बात और है कि उन्हें टिकट नहीं दिया गया था। वहीं अन्य सदस्यों का समर्थन हासिल करने का भी वो बात कह रहे हैं। हालांकि, ऊंट किस करवट बैठेगा, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।”



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