जिले में स्वास्थ्य सेवाएँ बदहाल, नहीं मिली एम्बुलेंस तो खाट पर मरीज को पहुंचाया अस्पताल

संजीव कुमार पांडेय (संवाददाता)

मिर्जापुर । स्वास्थ्य सेवा बेहतरी को लेकर किए जा रहे तमाम दावे आज भी सिफर साबित हो रहे हैं। इसकी हकीकत से ग्रामीण इलाकों के लोग रोजाना जूझते नजर आते हैं। स्वास्थ्य सेवा तो दूर, अस्पताल तक पहुंचने के लिए एंबुलेंस भी मरीज को नसीब नहीं हो पाई। इसकी एक बानगी तब देखने को मिली जब लालगंज के तिलांव गांव के गंभीर मरीज को चारपाई की डोली-खटोली बनाकर परिजन उपचार के लिए आठ किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाए।
विकास के नाम पर भले ही ढिढोरा पीटा जा रहा हो, लेकिन मुसहर जाति के लोग आज भी सुविधाओं से वंचित हैं। आधुनिक तकनीकी युग में भी गरीब अपने हाल पर जीवन व्यतीत करने को विवश हैं। शुक्रवार को क्षेत्र के तिलांव नंबर एक गांव निवासी गंभीर रूप से बीमार सत्तु मुसहर (62वर्ष) को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा नसीब नहीं हुई। परिजन चारपाई की डोली-खटोली बनाकर घर से आठ किलोमीटर दूर अस्पताल लेकर गए। परिवार के सामने आई मुसीबत का न तो गांव के प्रधान ने संज्ञान लिया और न ही प्रशासन। गंभीर होकर पेट दर्द से कराह रहे सत्तु मुसहर के परिजन जान बचाने के लिए आठ किलोमीटर दूर लालगंज अस्पताल तक डोली-खटोली से लेकर चल दिए, लेकिन धूप में इतना दूर जाना एक चुनौती से कम नहीं था। मरीज की हालत गंभीर होती जा रही थी। पैदल लालगंज पहुंचने के बजाय परिजनों ने हलिया ब्लाक के तिलांव नंबर एक गांव से दो किलोमीटर आगे लालगंज रोड स्थित कटाई गांव में एक झोलाछाप के यहां मरीज को पहुंचाया, जहां पर देर शाम तक उपचार चल रहा था। तिलांव नंबर एक गांव से डोली-खटोली लेकर चलने के बाद रास्ते में जितने भी राहगीर मिले, सहानुभूति जताते रहे। ऐसा नहीं है कि प्रशासनिक अधिकारी डोली-खटोली लाते नहीं देखे हों। तिलांव के पास गुजर रहे पीआरवी पुलिसकर्मी डोली-खटोली को अनदेखा कर निकल गए। मरीज के परिजनों ने बताया कि एंबुलेंस को बुलाने के लिए गांव के लोगों ने काफी प्रयास किया, लेकिन 108 नंबर एंबुलेंस नहीं पहुंच पाई।



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