पुलिस के पत्र से ओवरलोड का खुलासा, लेकिन जिम्मेदार सिर्फ चोपन थाना

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र में बालू खनन पर रोक लेकिन धड़ल्ले से चल रही ओवरलोड ट्रकें

● बड़ा सवाल आखिर कैसे बार्डर क्रॉस कर मारकुंडी तक पहुंच रही हैं ओवरलोड ट्रकें

सोनभद्र । प्रदेश में जीरो टॉलरेंस की नीति दर्शाने वाली योगी सरकार में सोनभद्र पुलिस को यह पता लगाने में लगभग साढ़े चार साल लग गए कि आखिर सोनभद्र में लगने वाले जाम की असली वजह क्या है।

दरअसल यह खुलासा तब हुआ जब सीओ सिटी द्वारा चोपन थानाध्यक्ष को लिखा एक पत्र वायरल हो गया। पत्र में सीओ ने लिखा है कि गुरमा में ओवरलोड ट्रक अनावश्यक रूप से खड़ा कर दिया जाता है, जिससे जाम की स्थिति बन जाती है । इसलिये ड्यूटी लगाकर उन्हें हटाया जाय ताकि जाम की स्थिति न बन सके।

सीओ का यह पत्र उस वक्त वायरल हुआ है जब सोनभद्र में एक भी बालू की खादन नहीं चल रही। ऐसे में सीओ सिटी के पत्र से एक तो यह साफ हो गया कि सोनभद्र में अभी भी ओवरलोड वाहन चल रहा है। वायरल पत्र के बाद दूसरी सबसे अहम बात निकल कर यह सामने आ रही है कि यह पत्र ऐसे समय में वायरल हुआ जब सूबे में राजनीति गर्म है और योगी सरकार के भीतर बदलाव व विस्तार की बात चल रही है। इस तरह के शासकीय पत्र से निश्चित तौर पर योगी सरकार को बड़ा झटका लग सकता है क्योंकि खनन मंत्रालय खुद मुख्यमंत्री के पास है।

देखें वीडियो-

अब सवाल यह उठता है कि जब सोनभद्र में बालू खनन की कोई साइड नहीं चल रही है तो ये ओवरलोड माल बार्डर पार कर मारकुंडी पहुंच कैसे रहे हैं। क्योंकि बार्डर से लेकर मारकुंडी के बीच में कई थाने पड़ते हैं, यदि ऐसा है तो सिर्फ चोपन ही जिम्मेदार कैसे? वे थाने जिम्मेदार क्यों नहीं जिनके थानों से यह ओवरलोड ट्रक गुजरी है और उन्हें या तो छोड़ दिया गया या फिर चेक नहीं किया गया।

बहरहाल ओवरलोड को लेकर पुलिस का यह पत्र न सिर्फ विभाग के लिए बल्कि सरकार के लिए भी गले की हड्डी बन गयी है। क्योंकि इसी खनन के चक्कर में सोनभद्र की पूर्व प्रभारी मंत्री की छुट्टी कर दी गयी थी और इस बार तो खनन मंत्रालय खुद मुख्यमंत्री के पास है लेकिन व्यवस्था पहले जैसी ही चल रही है।



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