हरे वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से जंगल हो रहे विरान

संजीव कुमार पांडेय (संवाददाता)

मिर्जापुर । वन क्षेत्र में धड़ल्ले से हो रहे हरे वृक्षो की अवैध कटाई से जंगल विरान हो रहे हैं। प्रत्येक वर्ष पौधरोपण के नाम पर विभाग की ओर से लाखों पेड़ तो लगाए जाते हैं। लेकिन अधिकांश पौधे जंगलों में नजर नहीं आते। बचेखुचे पेड़ भी विभाग की उदासीनता के चलते प्रति वर्ष आग की भेंट चढ़ जा रहे हैं।

विंध्याचल, देहात कोतवाली, पड़री, चुनार, मड़िहान, लालगंज, जिगना थाना क्षेत्रों में वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जा कर लोगों द्वारा घर, मकान व जमींनो पर खेती-बारी तक किया जा रहा है। विंध्याचल थाना क्षेत्र के दुहौआ, मगरदाकला, अरगजा पांडेय, दुबरा पहाड़ी, करनपुर, महुवारीकला आदि गांव में वन भूमि पर न सिर्फ कब्जा किए गए हैं बल्कि दुहौआ में कुछ लोगों के प्रधानमंत्री आवास तक बना दिए गए हैं। मजे की बात तो यह कि वनों की रखवाली के लिए वन रेंज में वाचर, वन दरोगा के साथ ही अन्य कर्मचारी तैनात हैं बावजूद इसके जंगलों से प्रतिदिन हरे व सूखे पेड़ धड़ल्ले से काटे जा रहे है। अवैध वनों के कटाई से न सिर्फ प्राकृतिक संपदा की छति हो रही है। बल्कि क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन की वजह से बरसात में भी तेजी से गिरावट आ रही है। कोरोना महामारी के इस दौर में आक्सीजन की कमी से लोगों को दम तोड़ते हुए भी देखा जा रहा है। लेकिन वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी लापरवाह बने हुए हैं।

सूत्रों की मानें तो पेड़ों की कटाई होते समय ही वनकर्मियों को खबर रहती है लेकिन मौके पर कोई वनकर्मी नहीं पहुंचता। जिसकी वजह से अवैध कटान में लगे लोगों के हौसलें बढ़े रहते हैं। समय रहते वनों की कटान पर अंकुश नहीं लगाया गया तो आने वाले दिनों में जंगल का अस्तित्व खत्म होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

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