टिड्डी दल के संभावित हमले को लेकर कृषि विभाग ने जारी किया अलर्ट

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । जिले में फसलों पर टिड्डी दल के हमले को लेकर एक बार फिर से अलर्ट जारी किया गया है। टिड्डी दल के पाकिस्तान से उड़ते हुए राजस्थान के रास्ते वेस्ट यूपी में प्रवेश की आशंका है। जैसलमेर में टिड्डी दल देखे जाने के बाद कृषि विभाग सक्रिय हो गया है। पिछले वर्ष कृषि विभाग के लिए टिड्डी दल सिरदर्द बन गया था। विभाग द्वारा किसानों को पहले से ही सतर्क रहने के लिए सचेत कर दिया गया है।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी जनार्दन कटियार के अनुसार, “संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन से जारी पूर्वानुमान के आधार पर राजस्थान में इस वर्ष फिर टिड्डी दलों के आक्रमण की संभावना व्यक्त की गई है। जिसे देखते हुए शासन ने बीते वर्ष की तरह इस वर्ष भी इससे बचाव की पर्याप्त तैयारी के निर्देश जारी किए गए है। ताकि आकस्मिक आक्रमण की दशा में बचाव के समुचित प्रयास किए जा सकें और किसानों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।”

ऐसे करें बचाव

जिला कृषि रक्षा अधिकारी जनार्दन कटियार ने बताया कि टिड्डी दलों के आक्रमण की दशा में एक साथ एकत्र होकर टीन के डिब्बों, थालियों, ढोलक-नगाड़ों, डी0जे0 आदि बजाते हुए तेज आवाज करने का सुझाव दिया जा रहा है। इससे टिड्डी दल आस-पास के खेतों में बैठ नहीं पायेंगें, जिससे नुकसान की संभावना नहीं होगी। बलुई मिट्टी टिड्डी के प्रजनन एवं अण्डे देने के लिए सर्वाधिक अनुकूल होती है। टिड्डी दलों के आक्रमण से संभावित ऐसे क्षेत्रों में जुताई करवा कर जल भराव करने के लिए सुझाव दिया जाता है। ऐसी दशा में टिड्डियों के प्रजनन/वृद्धि की संभवना कम हो जाती है। टिड्डी दल सामान्यतः रात्रि में फसलों, झाड़ियों एवं पेड़ों पर प्रवास करते हैं तथा इन्हें अत्यधिक क्षति पहुंचाते हैं। टिड्डी दलों के रात्रि प्रवास के समय ही इन पर संस्तृत कृषि रक्षा रसायनों जैसे क्लोरपाइरीफास 20% ई0सी0, क्लोरपाइरीफास 50% ई0सी0 लैम्ब्डासाइहेलोथ्रिन 5% ई0सी0, लैम्ब्डासाइहेलोथ्रिन 10 प्रतिशत डबलूपी, मैथाथियान 50% ईसी, डेल्टामेंथ्रिन 2.8% ई0सी0, फिप्रोनिल 5% एससी, फिप्रोनिल 2.8% ईसी इत्यादि का छिड़काव कर इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। टिड्डी दलों के प्रभावी नियंत्रण के लिए मैथाथियान 96%, यूएलबी का छिड़काव अत्यन्त प्रभावी होता है, परन्तु यह रसायन जनसामान्य को उपलब्ध न होने के कारण इसका छिड़काव भारत सरकार की तकनीकी टीम की देख-रेख में उनके पास उपलब्ध छिड़काव यंत्रों से ही किया जाता है। इस हेतु भारत सरकार के टिड्डी नियंत्रण संगठन, फरीदाबाद, हरियाणा से सम्पर्क किया जा सकता है साथ ही केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन केन्द्र, लखनऊ, गोरखपुर एवं आगरा से भी सम्पर्क कर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।



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