दुःखद : तीन दिन के दौरे में मंत्री को नहीं मिल सका मृत शिक्षकों के घर संवेदना व्यक्त करने का मौका

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

क्या आंकड़े छिपाने के खेल में शोक संवेदना नहीं कर सके मंत्री जी

● खुद को बताते हैं छ: लाख शिक्षक परिवार का मुखिया, प्रभारी जिले का नहीं पता आंकड़ा

● प्रभारी मंत्री ही नहीं, किसी स्थानीय विधायक ने नहीं व्यक्त घर जाकर की शोक संवेदना

सोनभद्र । यूपी पंचायत चुनाव में शिक्षकों की मौत के मामले में सरकार के शिक्षा मंत्री का एक ऐसा बयान आया है, जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे।

सोनभद्र दौरे पर आए बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री डॉ0 सतीश चंद्र द्विवेदी सोनभद्र के प्रभारी मंत्री भी हैं। प्रभारी मंत्री से पत्रकारों ने जब पंचायत चुनाव के दौरान जिले के शिक्षकों की हुई मौत पर जब सवाल किया तो मंत्री जी बंगले झाँकने लगे और बेतुका बयान दे डाला, जिसे पढ़कर आप भी हैरान रह जाएंगे। दरअसल यूपी पंचायत चुनाव में बड़ी संख्या में शिक्षकों की कोरोना सहित अन्य कारणों से मौतें हुई हैं लेकिन प्रभारी मंत्री का कहना है कि राज्य निर्वाचन आयोग की सूची के मुताबिक पूरे प्रदेश में सिर्फ तीन मौतें हुई हैं।

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मंत्री जी की तरफ से विज्ञप्ति जारी हुई तो विपक्ष सहित शिक्षक संगठन हमलावर हो गया। चौतरफा घिरते देख सीएम ने मुख्य सचिव को को दोबारा गाइडलाइंस में संशोधन करने की बात कही है। अब संसोधन कब होगा और क्या होगा यह तो भविष्य में पता चलेगा लेकिन बेसिक शिक्षा मंत्री व सोनभद्र जिले के प्रभारी मंत्री सतीश द्विवेदी को यह तक नहीं नहीं पता कि उनके प्रभार जिले में कितने शिक्षकों की मौतें हुई हैं।

जब पत्रकारों ने मंत्री से सवाल किया तो मंत्री जी का कहना था कि उन्हें आंकड़े नहीं पता, चूंकि आंकड़े रोज बदलते हैं। बेसिक शिक्षा मंत्री का कहना है कि वे खुद शिक्षक है और इतनी बड़ी संख्या के मुखिया हैं, यदि शिक्षकों को कोई लाभ मिलता है तो उन्हें सबसे ज्यादा खुशी होगी।

लेकिन मंत्री जी सवाल तो यही है कि यदि किसी परिवार के मुखिया को सदस्य के मौत की खबर ही नहीं तो आखिर वह परिवार की लड़ाई कैसे लड़ेगा। मंत्री जी आपको यह बात कड़वी जरूर लग सकती है लेकिन यह भी सच है कि जिस जिले में आप दौरे पर हैं वहां के आप प्रभारी मंत्री भी हैं। यानी प्रभारी मंत्री व शिक्षा विभाग के मुखिया दोनों, फिर भी आपको एक छोटे से जिले में कितने शिक्षकों की मृत्यु हुई है यह तक जानकारी नहीं। मंत्री जी अच्छा तो यह होता कि आप उन मृत शिक्षकों के घर जाकर शोक संवेदना व्यक्त करते लेकिन आपने तो यहां भी आंकड़े छिपाने के चक्कर में खड़े होकर मौन तक नहीं रखा।

बतादें कि जिला निर्वाचन कार्यालय (पंचायत) की सूची के मुताबिक पंचायत चुनाव के दौरान जिले में 9 शिक्षकों सहित कुल 13 कर्मचारियों की मौत हुई है। जिसमें अवर अभियंता-उ0प्र0 प्रदूषण नियंत्रण विभाग, सहायक विकास अधिकारी-कृषि विभाग, पूर्ति निरीक्षक-जिला पूर्ति कार्यालय तथा अवर अभियंता-लो0नि0वि0 निर्माण खण्ड शामिल हैं।

बहरहाल शिक्षकों की मौत के मामले में सरकार का फाइनल डिसीजन क्या आता है यह देखना दिलचस्प होगा लेकिन संवेदना से बड़ा राजनीति होता है, यह पहली बार देखा है।



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