डाला में दिखी मानवता की अजीब मिशाल, मुस्लिम महिला की निकली गाजे-बाजे के साथ कंधों पर अर्थी

संजय केसरी (संवाददाता)

डाला । कहते है जात-पात सब मनुष्य का बनाया हुआ है । ऐसे में मानवता ही सर्वपरि है । कोविड काल में जहां लोग घरों से नहीं निकल रहे हैं वहीं डाला में मानवता की एक ऐसी मिशाल देखने को मिली जिसे देख हर कोई दंग रह गया । एक वृद्ध मुस्लिम महिला की मृत्य के बाद उसका हिन्दू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार करने लिए गाजे-बाजे के साथ शव यात्रा निकाला गया । आलम यह था कि शव यात्रा में कंधा देने वालों की भीड़ लग गयी । लेकिन महिला के ससुराल व घर वाले पहुंचने के बाद उन्हें सौंप दिया गया ।

बताते चलें कि डाला के धौठा टोला में उप्र सीमेंट निगम कर्मी रहे जलील की मृत्यु लगभग सात साल पहले हो गयी थी। तब से उनकी पत्नी गुलशन डाला के धौठा टोला में अकेले निवास करती थी। पति के मिलने वाले पेंशन से किसी प्रकार उसका जीविकोपार्जन चला करता था । समाज में काफी सक्रिय रहने वाली गुलशन बहुत ही मिलनसार थी और लोगों की मददगार भी रहा करती थी । उम्र के साथ गुलशन की शारीरिक क्षमता धीरे-धीरे घटने लगी । जिसे देख डाला निवासी मनीष तिवारी नामक एक व्यक्ति ने गुलशन को सहयोग का हाथ बढ़ाया और लगभग तीन वर्षो से भी अधिक समय से मनीष गुलशन के सुख-दु:ख में पूरा सहयोग करता चला आ रहा था। बीते एक माह से गुलशन की तबियत ज्यादा खराब होने के कारण उसका बिस्तर से उठना भी मुश्किल हो गया था। जिसकी मंगलवार की भोर में मृत्यु हो गयी ।

गुलशन की मृत्यु की सूचना पनारी ग्राम पंचायत के चैनाटोला में रहने वाले उसके भाई सोना को देने के साथ ही उसके ससुराल के लोगों को भी दिया गया। ससुराल वालों ने बताया कि गुलशन विगत 15 वर्षो से सलखन आती-जाती नहीं थी।

इधर देर होते देख मनीष व आसपास के सैकड़ो रहवासियो ने पूरी हिन्दू रीति रिवाज से गुलशन की अर्थी तैयार की । जिसपर राम नाम की चादर लोगो ने चढ़ाया और पूरे सम्मान के साथ ढ़ोल-बाजे के साथ गुलशन की अर्थी को कंधें पर सवार कर अंतिम संस्कार के लिए निकल पड़े । देखते ही देखते गुलशन के शव यात्रा में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गयी । लोग कंधा देने के लिए लाइनों में लग गए । ऐसा शव यात्रा पहले कभी न नगर में निकली थी और न कभी देखी गयी । जो भी सुना बाहर निकल कर देखने लगा। मानवता से ऊपर उठ कर किये गए इस कार्य की हर कोई सराहना कर रहा था । गुलशन देवी की अर्थी अभी डेढ़ किमी तक ही पहुंची थी कि तभी मृतिका गुलशन के भाई सोना और उसके ससुराल पक्ष के लोग मौके पर पहुंचकर शव को अपने यहां ले जाने की मांग करने लगे। जिसे स्थानीय लोग मनीष कुमार तिवारी, प्यारेलाल ठाकूर, विमल विश्वकर्मा, आल्हा कुमार, लक्ष्मण चौधरी व विजय चौधरी सहित अन्य लोगों ने देने से इनकार कर दिया । मामले की जानकारी डाला चौकी प्रभारी एस.के.सोनकर को हुई तो उन्होंने तत्काल शव को मृतिका के परिवार जनो को सौपने की बात कही। जिसपर स्थानीय लोग सहमत हो गये और मृतिका को उनके परिवार वालों को सौप दिया और नम आंखों से विदाई दी ।



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