‘जीतना है तो लड़ना है’ की थीम पर अखिल भारतीय वेबिनार का अयोजन

जनपद न्यूज ब्यूरो

० कोविड-19 महामारी के संकट काल में भी एनटीपीसी ने अदम्य साहस और समर्पण का परिचय देते हुए बिजली के सभी निर्धारित लक्ष्य पूरे किए- शिवा प्रसाद जी

जीतना है तो लड़ना है कि थीम पर मानव संसाधन विभाग एनटीपीसी शक्तिनगर के सौजन्य से अखिल भारतीय वेबिनार का अयोजन करते हुए मानव संसाधन विभाग के प्रमुख शिवा प्रसाद जी ने उद्घाटन करते हुए सर्वप्रथम अपने विचार रखे। वेविनार से जुड़े सभी अथितियों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी पुरानी संस्कृति इस बात का द्योतक है कि वह इस प्रकार की बीमारी के बचाव की परंपरा का चलन पहले ही कर चुकी है जैसे बाहर से आने पर जूते बाहर खोलना, सर से शुरू कर के पांव को भलीभांति धोकर अंदर जाना। दूर से ही सब को अभिवादन करना और अभिवादन का हाथ जोड़ कर विनम्रता पूर्वक स्वीकार करना। अंत मे उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के संकट काल में भी एनटीपीसी सक्तिनगर परिवार ने अपने अदम्य साहस और समर्पण का परिचय देते हुए दिन रात मिहनत कर बिजली के सभी निर्धारित लक्ष्य पूरे किए और पूरे देश को बिजली प्रदान कर रहे हैं।
कार्यक्रम से जुड़े सभी प्रतिभागियों का वाणी से सम्मान श्री आदेश पांडे जी प्रबंधक मानव संसाधन विभाग ने किया। उन्होंने कहा कि हमारे शीर्ष प्रबंधन का यह विजन था कि इस विकट और कठिन समय मे जब सब भौतिक रूप से एक दूसरे से मिल नहीं सकते तो वेबिनार के माध्यम से एक दूसरे के विचार और अनुभव आपस मे साझा करें।
कसर्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉक्टर योगेंद्र मिश्रा जी ने अपने विचार रखते हुए अपनी बात को विस्तार से रखा। उन्होंने बताया कि सकारात्मक खबरें पढ़ते रहने और नकारात्मक विचारों को अपने मन से हटाते रहने का ही नाम जीवन है उन्होंने यह भी कहा कि यह कठिन समय है धैर्य से गुजर जाएगा और इस पर अपनी एक छोटी सी लघु कथा का वाचन भी किया उन्होंने बताया कि इस कठिन समय में हमें बस एक दूसरे का हाथ थामे रहना है और हिम्मत से काम लेना है यह कठिन समय है यह समय का आवर्तन है एक चक्र है लेकिन यह भी एक दिन निकल जाएगा और हम फिर वापस अपने पुराने दिनचर्या में लौट आएंगे। बच्चे पार्क में खेलेंगे और हम सड़कों पर फिर से चल फिर पाएंगे। वातावरण में फिर हमारे ठहाके गूंजे गे पर अभी फिलहाल तो हमें कोविड-19 के बताए गए गाइडलाइन का पूरी अनुशासन और ईमानदारी के साथ पालन करना है। उन्होंने कहा कि जब भी मन में नकारात्मक विचार आए तो तुरंत बड़े-बड़े लोगों की जीवन कथा पढ़ना प्रारंभ करिए आपके मन में सकारात्मक भाव जग जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह समय रामायण, गीता और महाभारत पढ़ने का है ताकि हमें अपने पुराने मनीषियों के त्याग तप और बलिदान का भान मान हो सके।
माना कि अंधेरा घना है पर दिया जलाना कब मना है।
अंत में अपने उद्बोधन में इस शायरी को पढ़ा कि
कभी फूल होंगे कभी खार होंगे,
जो किस्मत है उससे दो चार होंगे।
बहुत दूर की राह तय करली हमने,
बहुत जल्द ही अब हम उस पार होंगे।

अगले वक्ता के रूप में जनचेतना मंच के संयोजक सुरेश गिरि प्रखऱ ने अपनी बात रखते हुए सब का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित किया कि हमारा काम तो बहुत आसान है हमे घर पर रह कर नियमों का पालन करना है, पर हमको यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि इस विपरीत परिस्थितियों में भी एनटीपीसी सक्तिनगर प्रबंधन ने अपने सारे लक्ष्य को साहस और समर्पणभाव से हासिल किए। हमे डॉकटर और पैरा मेडिकल स्टाफ के साथ पुलिस प्रशासन का भी आभार प्रकट करना चाहिए। एक योजना बद्ध दिनचर्या ही कोविड को मात दे सकती है।अंत मे अपने एक मुक्तक को पढ़ा कि

नियम का अगर जो पालन करोगे,तोजीवन तुम्हारा सुरक्षित रहेगा।
भरम में अगर जो हमेशा रहोगे, तो खतरे में जीवन तुम्हारा रहेगा।।
प्रखऱ बातयह है इसे बस समंझलो, ननेता नईश्वर बचाएगा तुमको,
पहनों सदा मास्क, रहो दूरी बनाकर, धोते रहो हाथ बेहतर रहेगा।।

एस गुप्ता जी ने अगले क्रम में कहा कि हमने जरूरत पड़ी तो मात्र 10 प्रतिशत मैन पावर से काम चलाया और अहर्निश कर्तब्य पथ पर रत रहे। हमारे शीर्ष प्रबंधन का सहयोग और मार्गदर्शन ही हमारा सम्बल बना।

कुमार गौरव जी ने कहा कि एक जगह चार दिये घर के मुखिया के द्वारा जलाया गया। पहला दिया डर क़ा था जो सबसे पहले बुझ गया, दूसरा हिम्मत का दिया था जो थोड़ी देर तक जलने के बाद बुझ गया। तीसरा हौसले और बुलंदियों का दिया था बहुत देर तक जल कर बुझ गया पर चौथा दिया उम्मीद का दिया था जो अनवरत समवेत भाव से जलता रहा और मालिक की राह देखता रहा बस जैसे ही मालिक आया उसने सबसे पहले उम्मीद के दिये में तेल डालकर उसी दिए से अन्य तीनो दिये में तेल डाल कर सबको जला दिया। बस यही कहानी हम सब की है।

जिला प्रशासन से श्री प्रवेश मिश्रा जी ने सब का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि डीपीआरओ के पद पर रहते हुए मुझे रैपिड रेस्पांश का भी प्रभारी बन कर अपने कर्तब्यओं का पालन करते हुए सब को राहत प्रदान करना ही हमारा लक्ष्य है।
हमारी सब को सलाह है कि अपने अपने मन में ठान ले और सजग बन कर नियमों का दृढ़ता पूर्वक अपने जीवन में अनुपालन और अनुशीलन करें क्योंकि
कर्म वही जो बंधन काटे, धर्म वही जो दुर्दिन काटे।
हमे कर्म और धर्म का हाथ हमेशा थामें रहना है।।

इसी क्रम में जयप्रकाश कुशवाहा, प्रदीप कुमार सिंह,डॉ माणिक चंद पांडेय, सी यस जोशी , राम कबीर अंजू गुप्ता ने अपनी अपनी अनुभूति के सब के साथ साझा किया।।
इस वेबिनार में कई और लोग नोएडा, रामागुंडम से जुड़े रहे।
वेबिनार के अंत में आदेश पांडेय प्रबंधक राजभाषा ने सभी का आभार व्यक्त किया।।



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