कोरोना के साये में बीता रमजान कल मनाई जा सकती है ईद

घनश्याम पाण्डेय/विनीत शर्मा(संवाददाता)

चोपन। ये दूसरा साल है जब मुसलमानों का पवित्र माह रमजान कोरोना संकट के चलते लॉक डाउन और प्रतिबंधों के बीच गुजरा । कोरोना के पहले रमजान की जैसी चहल – पहल दिखती थी वह गायब है । लोग घरों में तो रमजान के महीने में रोजे और इबादतों के फर्ज को उसी आस्था , जज्बे और शिद्दत के साथ पूरा कर रहे हैं , लेकिन गांवो तथा शहर से रमजान की रौनक गायब है । न मस्जिदों में चहल – पहल है और न ही बाजार में रमजान की रौनकें । यहां तक कि नमाज भी घरों पर ही अदा की जा रही है । कोरोना संकट की दूसरी लहर को देखते हुए एक बार फिर लॉक डाउन लगा दिया गया है और प्रतिबंध लौट आए हैं । सर्वजनिक नमाज पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। बाकी रोजेदार घरों में ही नमाज और दूसरी इबादतें कर रहे हैं । तरावीह की नमाज इस साल भी नहीं पढ़ी जा सकी और अलविदा की नमाज भी लोगों ने घर पर ही अदा की । हालांकि ईद की नमाज भी सरकार की गाइडलाइन के अनुसार घर मे ही अदा की जाएगी । रमजान में इस बार भी कोरोना वायरस के चलते लोग घरों में बंद हैं । पिछले साल की ही तरह मुस्लिम समुदाय इस बार भी रमजान गाइडलाइन और प्रतिबंधों के बीच गुजारने को मजबूर हैं ।

चोपन जामा मस्जिद के इमाम सददाम कादरी कहते हैं कि यह दूसरा साल है जब लोग अपने – अपने घरों में बंद हैं और अकेले इफ्तार कर रहे हैं । उम्मीद थी कि इस साल सब ठीक होगा और अपने रिश्तेदारों और मिलने वालों के साथ मिलकर इफ्तार करेंगे और रमजान पहले जैसा बीतेगा , पर संकट अभी टला नहीं है इसलिये हम प्रतिबंधों में ही रमजान बिताने को मजबूर हैं । वहीं उन्होंने कहा कि रोज कमाने – खाने वाले संकट में हैं और उनकी मदद करना जरूरी है यह भी किसी इबादत से कम नहीं। अगले साल सब कुछ ठीक हो जाने की उम्मीद लगाए रोजेदार दुआ मांग रहे हैं कि संकट टल जाए और महामारी दुनिया से खत्म हो जाए । उम्मीद ही जीने की राह बनाती है हमें परवरदिगार से दुआ मांगनी चाहिये कि पूरी दुनिया से इस लाइलाज बीमारी से निजात दिलाए ।



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