प्री बोर्ड परीक्षा के आधार पर यूपी में घोषित हो रिजल्ट- प्रमोद चौबे

कृपाशंकर पांडे (संवाददाता)

-बोर्ड परीक्षा नहीं होने से तनाव में विद्यार्थी
-फरवरी में करा लेते बोर्ड परीक्षा, 30 फीसद कम था पाठ्यक्रम
-परीक्षा से अधिक पंचायत चुनाव को मिला महत्त्व

ओबरा। प्री बोर्ड परीक्षा के आधार पर यूपी में हाई स्कूल और इंटरमीडिएट का परीक्षा परिणाम घोषित करने का निर्णय सरकार को शीघ्र लेना चाहिए, क्योंकि विद्यार्थी यूपी बोर्ड परीक्षा नहीं होने से तनाव में हैं। उक्त बातें माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष व शिक्षा निकेतन इंटरमीडिएट कॉलेज ओबरा के प्रवक्ता प्रमोद चौबे ने उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री को ट्यूट कर कही है।
पूर्व जिलाध्यक्ष ने कहा है कि यूपी सरकार चाही होती तो फरवरी में ही यूपी बोर्ड की परीक्षा करा लेती, क्योंकि कोविद19 के चलते 30 फीसद पाठ्यक्रम कम कर दिया गया था। सरकार ने परीक्षा से अधिक पंचायत चुनाव को महत्त्व दिया अन्यथा बोर्ड परीक्षा सम्पन्न हो गई होती। स्वास्थ्य की सुरक्षा के मद्दे नजर मार्च, अप्रैल, मई में परीक्षा उचित नहीं है। कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते जून में भी परीक्षा कराना सम्भव नहीं दिखता है। ज्यादा बिलम्ब सत्र को क्षति पहुंचा देगा और आगे की पढ़ाई में बाधा आएगी। सबसे बड़ी बात है कि बोर्ड परीक्षा को लेकर विद्यार्थी तनाव में हैं। इस बीच बड़ी संख्या में बोर्ड अधिकारी, शिक्षक, गैर शिक्षक भी करोना की चपेट में हैं। वर्तमान परिस्थिति में लाखों विद्यार्थियों को तनाव से मुक्ति के लिए कॉलेज स्तर से आन लाइन रिज़ल्ट बनाने की व्यवस्था करके बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाना चाहिए।
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कैमरों की मरम्मत में चाहिए लाखों
माध्यमिक स्तर पर पूरे प्रदेश में करीब 85 फीसद विद्यालय वित्त विहीन हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब है। शिक्षकों को वेतन देने में भी प्रबंध तंत्र समर्थ नहीं है। ऐसी स्थिति में परीक्षा के नाम पर कैमरा आदि की मरम्मत के लिए धन मुहैया नहीं करा पाएंगे।
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यूपी हुकूमत से दुःखी हैं वित्तविहीन शिक्षक
अखिलेश की सपा सरकार में वित्त विहीन शिक्षकों को प्रतिमाह एक हजार रुपये महीने दिए जा रहे थे, जिसे योगी की भाजपा सरकार के आते ही बंद कर दिया गया है। भाजपा की यूपी हुकूमत से माध्यमिक शिक्षा के करीब साढ़े तीन लाख वित्त विहीन शिक्षक अत्यंत दुःखी हैं। इन्हें विद्यालय बंद होने से प्रबंध तंत्र से मिलने वाली वेतन के रूप में टोकन धनराशि नहीं मिल पा रही है।
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यूपी में दुर्भाग्यशाली शिक्षा व्यवस्था
उम्मीद थी की सपा की सरकार से भाजपा की सरकार में बेहतर होगा पर उससे भी नरक हो गया। सरकार सारे कार्य शिक्षकों से ले रही है पर उनके वेतन आदि की अनदेखी कर रही है। जो कत्तई उचित नहीं है।
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2022 में पहुँचेगा नुकसान
साढ़े तीन लाख वित्त विहीन शिक्षकों की अनदेखी यूपी की भाजपा सरकार को 2022 में नुकसान पहुंचाने में समर्थ है। अत्यंत दुःखी वित्तविहीन शिक्षक व उनके परिवार पेट भी भरने में समर्थ नहीं हो पा रहे हैं।
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निराश नहीं हैं सरकार से
वित्तविहीन शिक्षकों को अब भी उम्मीद है कि जीवन यापन के लिए यूपी की सरकार कोई न कोई कदम अवश्य उठाएगी, अन्यथा अन्य क्षेत्रों में सुंदर कार्य करने के बाद भी भाजपा सरकार की विदाई तय है।
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