आज हैं शीतला अष्टमी व्रत पूजा, जानें व्रत महत्व व पूजा विधि

शीतलता और शक्ति की देवी मां शीतला को समर्पित शीतला अष्टमी व्रत आज मनाया जाएगा। मान्यता
है कि इस दिन मां की विधि पूर्वक पूजा करने और व्रत रखने से मां शीतला प्रसन्न होती हैं। माता शीतला के व्रत से शरीर निरोगी होता है। स्किन से जुड़े रोग और चेचक जैसी बीमारियों से मां शीतला भक्तों की रक्षा करती हैं। माता शीतला की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों को कई तरह के संतापों से मुक्ति मिलती है।

शीतला माता के स्वरूप की बात करें तो खर (गधा) की सवारी करती हैं। माता के एक हाथ में कलश और दूसरे हाथ में कुश से निर्मित झाडू होता है। कहा कुल् लोग यह भी कहते हैं कि जो कलश है वह एक घड़ा है जिसमें शीतल जल होता है। इसी जल से मां अपने भक्तों का कष्ट दूर करती हैं।

शीतला अष्टमी पूजा विधि :
माता शीतला की पूजा-अर्चना में स्‍वच्‍छता/पवित्रता का विशेष महत्व है। व्रत के दिन प्रात: उठकर स्नान करने के बाद तैयार होकर मां शीतला की पूजा करना चाहिए। इसके साथ ही व्रत का संकल्प लेकर व्रत शुरू किया जाता है। व्रत के दौरान फलाहार किया जाता है। शाम को शीतला माता की पूजा-आरती के बाद व्रत का पारण किया जाता है और फिर व्रती प्रसाद गृहण करता है। इस दिन लोग पास के शीतला माता मंदिर में दर्शन, पूजा के लिए भी जाते हैं। लेकिन इस बार कोरोना के कारण अधिकांश मंदिरों/धार्मिक स्थलों को बंद रखा गया है।



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