कठिन परिस्थिति में मनोबल न टूटे, मन से मन का साथ न छूटे – स्वामी अड़गड़ानंद

जनपद ब्यूरो

-परमहंस स्वामी ने अपने संदेश में कहा कि, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हर व्यक्ति से कुशल व्यवहार करें

अत्यंत कष्टकारी समय में प्रत्येक व्यक्ति यथा संभव अशक्तों व निर्बलों की पूरे मनोयोग से सेवा करें

*वाराणसी। यह कठिन परिस्थिति है। इस विषम परिस्थिति में आप अपना मनोबल दृढ़ रखिये। अपनो से शारीरिक दूरी सही, लेकिन मन से दूर नहीं रहिये। एक-दूसरे का साथ और अटल विश्वास के बल पर ही इस महामारी पर विजय प्राप्त कर सकेंगे। यह सब ईश्वरीय ध्यान और आध्यात्म के पथ पर अडिग रहकर ही सम्भव है। इसलिए प्रभु का स्मरण करें। साथ ही सेवा भाव भी धारण करें। यह संदेश परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने फरीदाबाद आश्रम में प्रवास के दौरान अपने अनगिन भक्तों के लिए प्रेषित किया।
उन्होंने कहा कि इस भयकंर बीमारी से आज पूरा देश जंग लड़ रहा है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण कड़ी धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सक, नर्स सहित चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा हर व्यक्ति जो इस समय मानव सेवा में स्वयं को समर्पित कर दिए हैं, उन्हें अपमानित नहीं, वरन उनके साथ कुशल व्यवहार करें। ये सभी अपना धर्म ही निभा रहे हैं।
स्वामी श्री ने कहा कि धर्म ही जीवन का मूल आधार है। भारत देश युगों-युगों से पूरी मानव जाति को उचित मार्ग दिखाता रहा है। ऋषियों, मुनियों और वेद-वेदांगों से परिपूर्ण इस देश ने खुद को विश्वगुरु का रूप दिखाया। ऐसा यहां के परिवेश, सात्विकता और धर्म-अध्यात्म के बूते ही है। फिर चाहे धर्म कोई भी हो, पंथ कोई भी और संप्रदाय कोई भी हो। यह सभी एकेश्वरवाद का ही गूढ़ ज्ञान बांचते रहे हैं। उन्होंने ‘यथार्थ गीता’ के श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके नियमित पाठ से मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति का संचार निश्चित है। अतः घर-घर गीता पाठ करें।
अपने आध्यात्मिक संदेश के अंत में स्वामी परमहंस स्वामी कहा कि इस विकराल और अत्यंत कष्टकारी समय में प्रत्येक व्यक्ति यथा संभव अशक्तों और निर्बलों की सेवा पूरे मनोयोग से करें। ऐसा अवसर सभी को और सर्वदा प्राप्त नहीं होता है।

कुंभ मेला में ‘यथार्थ गीता’ : परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद महाराज के निर्देशानुसार उनके अनुनायियों द्वारा हाल ही में समापन हुए हरिद्वार कुंभ के दौरान ‘यथार्थ गीता’ वितरित किया जा चुका है। इसमें पुलिस बल, विभिन्न सामाजिक संगठनों सहित मेला अधिकारियों में लगभग एक लाख यथार्थ गीता बांटा गया था।



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