कोरोना काल में बच्चों का यूं रखें ख्याल, जानें क्या है डॉक्टर की राय

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । जिले में कोविड के केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कोरोना ने पिछले साल का आंकड़ा भी पार कर लिया है। यह महामारी जिस रफ्तार से बढ़ रही है, उससे लोगों में डर बढ़ता जा रहा है। पिछले साल जब कोरोना महामारी सामने आयी थी, उस वक्त यह कहा जा रहा था कि यह बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक नहीं है और उस दौरान ज्यादा बच्चे संक्रमित हुए भी नहीं थे। लेकिन कोरोना की इस दूसरी लहर बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक है और इस दूसरी लहर में बड़ी संख्या में बच्चे भी कोरोना वायरस से संक्रमित होते दिख रहे हैं। ऐसे में पैरंट्स का चिंतित होना लाजिमी है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आँकडों के मुताबिक अब तक जिले में 0-10 वर्ष तक के 175 बच्चे तथा 11-20 वर्ष तक के 852 किशोर व युवा अब तक कोरोना की चपेट में आ चुके हैं।

ऐसे में बच्चों को कोरोना से कैसे बचाया जा सकता है, इस बारे में जिला संयुक्त अस्पताल के शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ0 प्रशांत शुक्ला का कहना है कि “बच्चों को कोविड-19 इस बार जरूर हो रहा है, लेकिन मृत्युदर बेहद कम है, यह हमारे लिए अच्छी बात है। डॉ0 प्रशांत शुक्ला ने कहा कि बच्चों को कोरोना हो तो रहा है, लेकिन सोनभद्र में उनके ठीक होने का प्रतिशत लगभग शत प्रतिशत है। बावजूद इसके हमें बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है, क्योंकि बच्चों के लिए अभी किसी भी तरीके की कोई वैक्सीनेशन शुरू नहीं हुई है।”

डॉ0 प्रशांत शुक्ला ने कहा कि “बच्चों को जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके विटामिन सी टैबलेट दें, इससे उनके शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की मात्रा कम नहीं होगी। दिन में गर्म पानी में नींबू का रस दे सकते हैं। रात में सोने से पहले हल्दी वाला दूध भी बच्चों को इन दिनों पीने को दें। इससे उनके शरीर की इम्युनिटी बढ़ेगी। इन दिनों गर्मी ज्यादा पड़ रही है, जिसमें बच्चों को रसदार फल खाना अच्छा लगता है। कोविड-19 से बचाव के लिए ऐसे फलों का खूब सेवन कराएं। जो बच्चे फल न खाते हों, उन्हें जूस पिला सकते हैं, इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी। अगर बहुत जरूरी हो तभी बच्चों को घर से बाहर ले जाएं। बिना कारण बच्चों को घर से बिल्कुल भी ना निकलने दें। पार्क या खेल के मैदानों में भी भेजने से परहेज करें। आमतौर पर यह भी लोगों में मिथक है कि ज्यादा सैनेटाइजर यूज करने से स्क्रीन खराब हो जाती है, बच्चों की स्किन वैसे ही बहुत ज्यादा नाज़ुक होती है, ऐसे में बच्चों के लिए सैनेटाइजर की जगह नहाने वाला साबुन यूज कर सकते हैं। बच्चों को जब भी नहलाएं तो पानी में एक ढक्कन डेटॉल डाल दें, नहाने में कोताही न बरतें, ताकि संक्रमण का खतरा न रहे। बच्चों की हाइजीन का विशेष ध्यान रखना है, इसलिए उनके कपड़े और बेडसीट रोज बदलने हैं। एक दिन से ज्यादा पहना हुआ कपड़े इस्तेमाल ना करें।”

बच्चों में दिखें ये लक्षण तो नजरअंदाज न करें

बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ0 प्रशांत शुक्ला ने बताया कि “यदि बच्चों में बुखार, सर्दी-जुकाम, सूखी खांसी, लूज मोशन, उल्टी आना, भूख न लगना , थकान महसूस होना, शरीर पर रैशेज (चकत्ते) दिखना और सांस लेने में दिक्कत महसूस होना जैसे लक्षण दिखें तो इन्हें नजरअंदाज न करें बल्कि तुरन्त डॉक्टर से सलाह लें और कोरोना की जाँच कराएँ। अगर बच्चे में कोविड संक्रमण की पुष्टि हो जाए और डॉक्टर बच्चे को घर पर ही क्वारंटीन रहने की सलाह दें तो बच्चे को घर पर अन्य लोगों से दूर रखें। अगर संभव हो तो बच्चे के लिए परिवार के बाकी सदस्यों से अलग बेडरूम और बाथरूम की व्यवस्था करें। संक्रमित बच्चे की देखभाल करते वक्त माता-पिता ग्लब्स और डबल मास्क पहनें और डॉक्टर की सलाह के मुताबिक ही इलाज करवाएं। खुद से कोई दवा बच्चों को न दें।”



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