लॉक डाउन की घोषणा के बाद घर निकले प्रवासी मजदूरों का डग्गामार वाहनों ने किया शोषण

गौरव पाण्डेय (संवाददाता)

दिल्ली सरकार द्वारा लॉकडाउन की घोषणा के बाद अपने घर तक पहुंचने की जिद्दोजहद में जुटे प्रवासी मजदूरों का डग्गामार वाहनों ने जमकर शोषण किया। एक ओर तो इन लोगों से मनमर्जी का किराया वसूल किया। इतना ही नहीं उन्हें उनके घर तक न छोड़कर रास्ते में छोड़ गए।
फरीदपुर पहुंचे प्रवासी मजदूरों को देखते ही, बीते वर्ष की यादें ताजा हो गईं। जब कोरोना संक्रमण अपने चरम पर था और पूरे भारत में लॉकडाउन लगा दिया गया था। काम खत्म हो जाने और नौकरियां चले जाने के बाद परेशान होकर प्रवासी मजदूरों ने अपने घर रूख कर लिया था। हाल इतना भयावह था कि लोग डग्गामार वाहनों से और पैदल ही अपने-अपने घरों को निकल पड़े। ठीक उसी तरह है एक बार फिर जब दिल्ली में लॉक डाउन की घोषणा की गई तब रोजमर्रा मजदूरी कर पेट पालने वाले ही प्रवासी मजदूर दिल्ली को छोड़ने पर मजबूर हो गए। जैसे तैसे पैसे इकट्ठे कर प्रवासी मजदूरों ने डग्गामार वाहनों से अपने अपने घरों के लिए रवाना हुए लेकिन डग्गामार वाहनों ने इन लोगों से न केवल किराया ही अधिक लिया बल्कि उन्हें उनके होमटाउन न छोड़कर फरीदपुर में उतार कर चले गए। चिलचिलाती धूप में भूखे प्यासे बेचारे प्रवासी मजदूर इधर-उधर भटकते रहे। देश एक बार फिर कोरोना महामारी से जूझ रहा है। वहीं डग्गामार वाहन चालक बेखौफ होकर इस विश्वव्यापी संक्रमण से बचाव को सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन की धज्जियां उड़ा रहे हैं। वहीं संबंधित विभागीय अधिकारी भी जमकर अनदेखी कर रहे हैं। जो कोरोना संक्रमण को और विकराल रूप दे सकता है। जहां एक ओर सरकार गरीबों के सामने बड़े-बड़े दावे पेश करती है। वहीं जब कठिन परिस्थितियां आती है तो सरकार को इन गरीबों के की गरीबी दिखाई नहीं देती। न ही इनके भूखे पेट किसी को दिखाई देते हैं। जिसके चलते काम न होने पर और लॉकडाउन में फंसकर भूखे पेट रहने के डर से अपने अपने घरों के लिए निकल पड़े हैं।



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