कोरोना से प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष की मौत, शोक की लहर

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । कोरोना की दूसरी लहर कितनी खतरनाक है यह अंदाजा शायद अभी भी बहुत लोग नहीं लगा पा रहे। जहां एक तरफ हर दिन कोरोना के आंकड़ों में इजाफा हो रहा वहीं मौत का आंकड़ा भी थमने का नाम नहीं ले रहा। आज तड़के प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष अशोक सिंह के निधन से पूरे जनपद में हड़कम्प मच गया। अशोक सिंह कोरोना पॉजिटिव थे और L-2 में भर्ती थे। उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी और आखिरकार आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। जिलाध्यक्ष के मौत की खबर के बाद शिक्षक जगत में शोक की लहर दौड़ गयी। इस दुख की घड़ी में बेसिक शिक्षा अधिकारी से लेकर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष ने गहरा दुःख व्यक्त किया है।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोरखनाथ पटेल ने अशोक सिंह के निधन पर दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि अशोक सिंह एक मृदुभाषी और मिलनसार व्यक्ति थे।

वहीं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष योगेश पांडेय ने अशोक सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग के लिए यह एक अपूर्णीय क्षति है। प्राथमिक शिक्षकों ने एक गार्जियन और एक बड़ा भाई खो दिया। हम सरकार से मांग करते हैं कि कोरोना काल को देखते हुए शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी से मुक्त किया जाय या सभी शिक्षकों को कोरोना योद्धा की श्रेणी में रखते हुए ₹50 लाख का बीमा कवर दिया जाय। अन्यथा सभी प्राथमिक शिक्षक चुनाव ड्यूटी का बहिष्कार करने को बाध्य होंगे।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के संयोजक अशोक त्रिपाठी व सहसंयोजक इंदु प्रकाश सिंह ने अशोक सिंह के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है । इंदु प्रकाश सिंह ने कहा कि अशोक सिंह बेहद मृदुभाषी थे और शिक्षकों की समस्याओं के लिए हमेशा तत्पर रहते थे । उन्होंने कहा कि अशोक सिंह का इस तरह चले जाना विश्वास नहीं हो रहा । उनके जाने से शिक्षक परिवार को बड़ी क्षति हुई है । भगवान उनके आत्मा को शांति प्रदान करने के साथ अपने चरणों में स्थान दे । ओम शांति …

अभी मिल रही ताजा अपडेट के मुताबिक बेसिक शिक्षा अधिकारी समेत ढेरो की संख्या में अध्यापक अस्पताल में मौजूद हैं लेकिन शव को उठाने की कोई व्यवस्था न होने की वजह से सभी परेशान हैं। बताया जा रहा है कि कोई भी स्वास्थ्य विभाग का अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहा।

अब सवाल यह उठता है कि आखिर कोरोना मरीज के शव को उठाने की जिम्मेदारी भी स्वास्थ्य विभाग की है तो आखिर देर क्यों हो रही?

बहरहाल सरकार दावे चाहे कितनी भी कर ले लेकिन सच्चाई यह है कि कोरोना की इस लहर से हर व्यक्ति जरूर डरा हुआ है, कुछ मजबूरी में निकल रहे हैं तो कुछ सरकार की गलत नीति के शिकार होकर घरों से बाहर निकलने को मजबूत हैं।



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