स्वास्थ्य विभाग में बढ़ रही नाराजगी कहीं महामारी पर न पड़ जाय भारी

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

● बिना कारण कई डॉक्टरों व फार्मासिस्टों का रोक दिया वेतन

● स्वास्थ्य कर्मियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख लगाई गुहार

सोनभद्र । जहां एक तरफ सूबे में कोरोना के आंकड़ों ने सरकार को बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया है। सरकार को खुद समझ में नहीं आ रहा कि आखिर वे क्या उपाय करें कि आंकड़ों में कमी आ सके। सरकार के लिए चिंता का विषय यह भी है कि सूबे के कई बड़े अधिकारी व डॉक्टर खुद इस संक्रमण की चपेट में हैं। सूबे के सबसे पिछड़े व अंतिम विधान सभा में भी मौत का आंकड़ा हर दिन बढ़ रहा है। रविवार को 5 मौत के बाद आज सोमवार को 7 मौत ने जनपद वासियों को झकझोर कर रख दिया। रविवार को सदर विधायक भूपेश चौबे ने भी आइसोलेशन सेंटर जाकर निरीक्षण किया और किसी भी लापरवाही से बचने की सख्त हिदायत दी थी।ल लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लाचारी साफ दिख रही है कि आज फिर 7 मौत हो गयी।

जहां एक तरफ जिला प्रशासन व सरकार के विधायक लोगों की जिन्दगी बचाने के उपाय ढूंढ रहे हैं वहीं सोनभद्र सीएमओ कार्यालय के अंदरखाने में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा।

जनपद न्यूज live के हाथ लगे पत्र के मुताबिक इस महामारी के दौर में जब सबको एक टीम वर्क बनाकर काम करना चाहिए और लोगों के मनोबल को बढ़ाना चाहिए, वहीं सीएमओ द्वारा कई डॉक्टर व फार्मासिस्टों के वेतन तक रोक दिया गया है, जिससे उन स्वास्थ्यकर्मियों के सामने परिवार के भरण-पोषण की भारी समस्या उत्पन्न हो गयी।

जनपद न्यूज live के हाथ लगे पत्र के मुताबिक मुख्य चिकित्साधिकारी एवं उनके कार्यालय द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के 10 स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन रोक दिया है। स्वास्थ्य कर्मियों का आरोप है कि सीएमओ कार्यालय द्वारा मानसिक प्रताड़ना भी दिया जा रहा है जिससे वे इस वैश्विक महामारी में बेहद परेशान हैं। स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो कर मुख्य चिकित्साधिकारी से कई बार मौखिक रूप से वेतन भुगतान हेतु अनुरोध किया लेकिन आज तक माह मार्च-2021 का वेतन भुगतान नहीं किया गया। इसलिए सभी ने वेतन को लेकर मुख्यमंत्री से भी गुहार लगाई है।

ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब पूरे प्रदेश में कोरोना की लहर चल रही है और स्वास्थ्यकर्मी निडरता से लोगों की सेवा में जुटे है। ऐसे में सोनभद्र सीएमओ द्वारा इस तरह के फैसले से न सिर्फ जनता का नुकसान होगा बल्कि स्वास्थ्य विभाग की छवि भी धूमिल होगी क्योंकि लगातार बढ़ रहे आंकड़ों को देखते हुए स्वास्थ्य टीम भी कम पड़ जा रही है। ऐसे में इस तरह का फैसला बड़ा नुकसान कर सकता है।



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