चैत्र नवरात्रि: छठवां दिन है मां कात्यायनी को समर्पित, विधि विधान से पूजा करने से होती हैं मनोकामना पूरी, जानें

चैत्र नवरात्रि का छठवां दिन है मां कात्यायनी को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इसके अलावा मां कात्यायनी विवाह में आने वाली परेशानियों को भी दूर करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां कात्यायनी ने महिषापुर का वध किया था। असुर महिषासुर का वध करने के कारण इन्हें दानवों, असुरों और पापियों का नाश करने वाली देवी कहा जाता है।

मां कात्यायनी का स्वरूप:
मां कात्यायनी आकर्षक स्वरूप की हैं। मां का शरीर सोने की तरह चमकीला है। मां की चार भुजाएं हैं। मां की सवारी सिंह यानी शेर है। मां के एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित है। मां के दूसरे दोनों हाथ वर और अभयमुद्रा में हैं।

इन मुहूर्त में ना करें मां कात्यायनी की पूजा:
राहुकाल- 04:57 पी एम से 06:34 पी एम तक।
यमगण्ड- 12:08 पी एम से 01:45 पी एम तक।
गुलिक काल- 03:21 पी एम से 04:57 पी एम तक।
दुर्मुहूर्त- 04:51 पी एम से 05:42 पी एम तक।
वर्ज्य- 11:50 ए एम से 01:35 पी एम तक।

मां कात्यायनी का प्रिय पुष्प और शुभ रंग:
आज चैत्र नवरात्रि के छठवें दिन कात्यायनी को लाल रंग का पुष्प खासकर लाल गुलाब बहुत प्रिय है। ऐसे में मां की पूजा के दौरान उन्हें गुलाब का पुष्प अर्पित करें।

मां कात्यायनी का भोग:
माता कात्यायनी को शहद सबसे ज्यादा पसंद है।

मां कात्यायनी की आरती:

जय-जय अम्बे जय कात्यायनी

जय जगमाता जग की महारानी

बैजनाथ स्थान तुम्हारा

वहा वरदाती नाम पुकारा

कई नाम है कई धाम है

यह स्थान भी तो सुखधाम है

हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी

कही योगेश्वरी महिमा न्यारी

हर जगह उत्सव होते रहते

हर मंदिर में भगत हैं कहते

कत्यानी रक्षक काया की

ग्रंथि काटे मोह माया की

झूठे मोह से छुडाने वाली

अपना नाम जपाने वाली

बृहस्‍पतिवार को पूजा करिए

ध्यान कात्यायनी का धरिए

हर संकट को दूर करेगी

भंडारे भरपूर करेगी

जो भी मां को ‘चमन’ पुकारे

कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।



अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...
Back to top button
error: Content is protected !!