पॉक्सो एक्ट : दोषी को 20 साल की कैद

● 21 हजार रुपये अर्थदंड, न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद

● 9 साल की नाबालिग लड़की के साथ हुए दुष्कर्म का मामला

सोनभद्र। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट पंकज श्रीवास्तव की अदालत ने बुधवार को पॉक्सो एक्ट में दोषी मनीष कुमार को दोषसिद्ध पाकर 20 साल की कैद एवं 21 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अर्थदंड न देने पर 6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के चुर्क चौकी में दी तहरीर में पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया था कि वह अपने बेटे के आंख का ऑपरेशन कराने के लिए अपनी पत्नी को साथ लेकर दिल्ली एम्स अस्पताल गया था। घर पर उसकी दो नाबालिग बेटियां अकेले रहकर पढ़ने जाती थी। घटना 20 दिसंबर 2017 को दोपहर 12 बजे की है। एक परिचित महिला ने मेरी 9 वर्षीय नाबालिग बेटी जो कक्षा 5 की छात्रा थी से कहा कि उसका बेटा मनीष घर में सो रहा है जाकर जगा दो। जब बेटी उसे घर में जगाने गई तो मनीष कुमार बेटी को पकड़ लिया और मुंह बंद करके उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। साथ ही धमकी दिया कि अगर किसी से बताओगी तो दोनों बहनों को जान से मार देंगे। डर की वजह से वह किसी से नहीं बताई, लेकिन ब्लड जाने की वजह से वह कराहते हुए गांव के एक परिचित व्यक्ति के घर गई तो गम्भीर हालत को देखकर अस्पताल ले जाकर बेटी का दवा-इलाज कराया। जब महिला डॉक्टर ने पूछताछ किया तो बेटी ने सारी सच्चाई बता दिया। इसके बाद फोन से सूचना मिली तो घर आने के बाद बेटी से सच्चाई जानने के बाद 27 दिसंबर 2017 को दी तहरीर पर राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के मुसही गांव निवासी मनीष कुमार के विरूद्ध दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट में एफआईआर दर्ज की गई। विवेचना के बाद पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने मनीष के विरुद्ध न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया था। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी मनीष कुमार को 20 साल की कैद एवं 21 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अर्थदंड न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष अभियोजन अधिकारी दिनेश प्रसाद अग्रहरि ने बहस की।



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