पंचायत चुनाव : उम्मीदवार कितना कर सकेंगे खर्च? कितनी जमानत राशि, जानें हर डीटेल

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों की चुनाव खर्च सीमा निर्धारित कर दी गई है। उससे अधिक खर्च करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी पदों के लिए जमानत राशि भी निर्धारित की की गई है।

बताते चलें सोनभद्र में आखिरी चरण यानी 29 अप्रैल को मतदान होना है। इससे पूर्व 17 व 18 अप्रैल को नामांकन पत्र दाखिल होगा तथा 20 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच की प्रक्रिया सम्पन्न होगी और 21 अप्रैल को शाम 3 बजे तक उम्मीदवार पर्चा वापस ले सकेंगे, उसी दिन तीन बजे के बाद चुनाव चिन्हों का वितरण किया जाएगा। गुरुवार से ही जिले के सभी विकास खंड कार्यालयों से नामांकन पत्रों की बिक्री शुरू हो चुकी है।

कितने रुपये का मिलेगा पर्चा

विकास खंड कार्यालयों से गुरुवार से पर्चा (नामांकन पत्र) बिक्री शुरू हो चुका है। सभी पदों के लिए नामांकन पत्र की अलग-अलग दर निर्धारित की गई है। ग्राम पंचायत सदस्य को नामांकन पत्र 150 रुपये में, प्रधान और बीडीसी को 300 रुपये में और जिला पंचायत सदस्य को 500 रुपये में मिलेगा। एससी, ओबीसी और महिला वर्ग के उम्मीदवारों को नामांकन पत्र आधे दाम पर मिलेगा।

प्रधान की जमानत राशि 2000 रुपये

चुनाव लडऩे वाले प्रत्याशियों को जमानत राशि जमा करनी होगी। सदस्य के लिए जमानत राशि पांच सौ रुपये निर्धारित की गई है। प्रधान और बीडीसी को दो हजार रुपये जमानत राशि देना होगा। जबकि जिला पंचायत सदस्य को चार हजार रुपये जमा करना होगा। जमानत राशि नगद भी जमा कराई जा सकती है। अगर प्रत्याशी इसे चालान के माध्यम से बैंक में जमा करवाते हैं तो निर्वाचन अधिकारी को इसकी रसीद देनी पड़ेगी।

चुनाव में अधिकतम इतना ही कर सकेंगे खर्च

ऐसे में ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य पदों पर चुनाव लडऩे वालों को खर्चे का ब्यौरा देना होगा। राज्य चुनाव आयोग से जारी निर्देश के अनुसार प्रधान पद के दावेदार चुनाव प्रचार में अधिकतर 75 हजार रुपये खर्च कर सकते हैं। इतनी ही धनराशि क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) के लिए भी निर्धारित की गई है। जबकि, जिला पंचायत सदस्य के लिए यह सीमा 1.50 लाख रुपये कर दी गई है। वहीं, ग्राम पंचायत सदस्य के लिए दस हजार रुपये ही निर्धारित की गई है। ग्राम पंचायत सदस्य का दायरा प्रधान से भी कम होता, इसलिए चुनावी खर्च सबसे कम है।



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