पंचायत चुनाव-2021 : तारीखों के एलान के बाद सियासी दलों ने झोंकी ताकत

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । देश के सबसे बड़े चुनाव पंचायत चुनाव 2021 का बिगुल बज चुका है। ऐसे में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनावों को सत्ता के सेमीफइनल की तरह देखा जा रहा है। यही वजह है कि प्रदेश की सभी प्रमुख सियासी पार्टी बीजेपी, सपा, बसपा, कांग्रेस समेत आम आदमी पार्टी और अपना दल ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। सभी पार्टियों की कोशिश है कि वे 2022 से पहले पंचायत चुनाव के जरिए जनता को एक संदेश भेज सके।

बात करें आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र की तो यहाँ भी सभी दलों ने बैठकें कर टिकट पर मंथन प्रारम्भ कर दिया है साथ ही सभी दलों ने जिले में चुनाव प्रभारी भी नियुक्त कर दिया है।

बीजेपी – सत्ताधारी दल होने के नाते बीजेपी की प्रतिष्ठा सबसे अधिक दांव पर लगी है। हालांकि पार्टी ने पंचायत चुनाव की तैयारी बहुत पहले से ही शुरू कर दी थी। पार्टी ने मंडल से लेकर पंचायत स्तर तक कई बैठकें कर पदाधिकारियों को जनता के बीच सरकार के कार्यों को पहुंचाने का जिम्मा भी सौंपा है। इतना ही नहीं पार्टी अपना पूरा ख़ाका तैयार कर लिया है । किसे समर्थन या फिर टिकट देना है सब पर शीर्ष नेतृत्व मंथन कर चुका है । सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के मुताबिक बीजेपी आज पंचायत चुनाव को लेकर अपनी पहली सूची जारी कर सकती है ।

समाजवादी पार्टी – सपा ने भी पंचायत चुनाव में अपनी पूरी ताकत लगा दी है। किसान आंदोलन से उसकी उम्मीदें बढ़ी हैं। यही वजह है कि पार्टी समर्थित प्रत्याशी अभियान व आंदोलनों के जरिए जनता के बीच अपनी पैठ बना रहे हैं। प्रत्याशियों को टिकट देने की जिम्मेदारी भी जिला इकाइयों को सौंपी गई है। पार्टी के पदाधिकारी अभी अपना पत्ता नहीं खोलना चाह रहे हैं । सपा सत्ता में भले ही न हो मगर पार्टी से टिकट मांगने वालों की लाइन लगी हुई है । पंचायत चुनाव के जरिये सपा भी 2022 विधान सभा के सत्ता को हथियाना चाहती है ।

बसपा – बात बहुजन समाजवादी पार्टी की करें तो लंबे समय से पार्टी की सक्रियता कम देखने को मिल रही लेकिन पंचायत चुनाव के जरिये पार्टी खुद को रिनिवल करना चाहती है । ग्राम स्तर के इस चुनाव से पार्टी यह भांप लेना चाहती है कि 2022 विधान सभा के लिये उनकी सेना कितनी तैयार है । पंचायत चुनावों के लिए प्रत्याशी चुनने की जिम्मेदारी बसपा ने मुख्य जोन इंचार्जों को सौंपी है। पार्टी कार्यकर्ता स्थानीय स्तर पर जाकर संभावित प्रत्याशियों के लिए वोट भी मांग रहे हैं। इन चुनावों को लेकर बसपा कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती साफ किया है कि विधानसभा चुनाव में टिकट पंचायत चुनाव के परफॉरमेंस के आधार पर ही दिया जाएगा।

कांग्रेस – कांग्रेस की बात करें तो वह अपनी खोई जमीन पंचायत चुनाव के माध्यम से पाने की कोशिश में हैं। पार्टी पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्यों पर दांव लगाएगी। फिलहाल पार्टी ने तय किया है कि उसके समर्थन से ज्यादा से ज्यादा जिला पंचायत सदस्य जीतें। जिले में संगठन के पदाधिकारियों को पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे योग्य उम्मीदवार की तलाश करें। यूपी में प्रियंका गांधी की सक्रियता जरूर बढ़ी है और यूपी राजनीति की चर्चा में भी है लेकिन प्रियंका का जादू विधानसभा में ही देखने को मिलेगा। मगर पंचायत चुनाव पर उनकी पैनी निगाह जरूर है, क्योंकि उन्हें भी पता है कि पंचायत चुनाव वह सीढ़ी है जिसे चढ़ कर ही विधानसभा के गलियारे तक पहुंचा जा सकता है।

आम आदमी पार्टी – यूं तो आम आदमी पार्टी लोकसभा व विधानसभा में अपनी किस्मत आजमा चुकी है लेकिन इस बार पार्टी की निगाह यूपी विधानसभा 2022 पर टिकी है इसलिए पार्टी भी और दलों की तरह पंचायत का सेमीफाइनल खेलना चाहती है। पार्टी ने कुछ प्रत्याशियों के नाम का ऐलान भी कर दिया है। पार्टी के आला नेता लगातार स्थानीय मुद्दों को उठा रहे है, ताकि जनता के बीच पार्टी के जनाधार को मजबूत किया जा सके। पार्टी ने बड़े नेता सांसद संजय सिंह भी सोनभद्र का दौरा कर चुके हैं।

अपना दल – देश में भाजपा के साथ गठबंधन की सरकार में शामिल अपना दल आगामी विधान सभा चुनाव से पहले अपनी तैयारियों को परखना चाहती है। इसको लेकर पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है साथ ही पार्टी कार्यकर्ता स्थानीय स्तर पर जाकर संभावित प्रत्याशियों के लिए वोट भी मांग रहे हैं। पंचायत चुनाव को लेकर अपना दल कितनी गंभीर है इस बात का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल सूबे के हर जिले में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में स्वयं पहुँच कर कार्यकर्ताओं में जोश भर रही हैं। हालांकि पार्टी ने अभी तक अपने प्रत्याशियों के पत्ते नहीं खोले लेकिन कई लड़ने वाले उम्मीदवार खुद को प्रत्याशी मान कर पोस्टरों के माध्यम से प्रचार कर रहे हैं ।

कुल मिलाकर चुनाव का फाइनल भले ही 2022 में हो लेकिन 2021 का सेमीफाइनल भी काफी दिलचस्प होने की उम्मीद जताई जा रही है। अब देखने वाली बात यह है कि पंचायती रण में कौन किसे पटखनी देता है।



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