सुदूर अंचलों में पहाड़ी नदियों का जल स्तर सूखने के कगार पर, लोगों को सताने लगी प्यास बुझाने की चिंता

धर्मेन्द्र गुप्ता (संवाददाता)

– जलधाराओं के स्थिर हो जाने के कारण गहराती जा रही पेय जल संकट

विंढमगंज(सोनभद्र)।जल ही जीवन है।बिना जल के जीवन की कल्पना भी नही की जा सकती।परन्तु प्रकृति के जीवन चक्र में कभी यही पानी तबाही ला देती है तो कहीँ किसी को अंतिम बूँद भी नसीब नही हो पाती।

अप्रैल माह के शुरुआत में ही सुदूर ग्रामीण अंचलों में गर्मी के दस्तक से ही जन मानस के हलक सूखने लगे है।इन सुदूर ग्रामीण अंचलों सहित दक्षिणांचल के सभी तटवर्ती इलाकों में पेयजल की समस्या गहराने लगी है।लगातार जल स्तर में हो रहे गिरावट तथा पहाड़ी नदियों के जलधाराओं के सिमट जाने के कारण इन क्षेत्रों के लिए पेय जल संकट का पर्याय बनता जा रहा है।अचानक तेज धुप और गर्म हवाओं के थपेड़ो के कारण नदी ,तालाब,पोखरे,ट्यूबवेल अचानक हांफने लगे हैं।गर्मी के मौसम की आहट से मुश्किल से पिने कि पानी तो मुहैया हो जा रही है परन्तु रहवासियों को अपने पशु-पक्षियों के लिए बिन पानी संकट के बादल छाने लगी है।कुछ जल श्रोतों जिनके रिसाव के कारण पानी मिल रहे है उन्ही से तटीय क्षेत्रों में बसे ग्रामीणों की केवल पिने की पानी मुनासिब हो रहा है।


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