जन आंदोलन के रूप में टीबी उन्मूलन के लिए चलेगा अभियान : डॉ0 बी0के0अग्रवाल

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । देश को 2025 तक टीवी मुक्त भारत बनाने की दिशा में सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर सीएम योगी ने प्रदेश वासियों को कई सौगातें दी हैं।

विश्व क्षय रोग दिवस पर आज सीएम योगी के हाथों प्रशस्तिपत्र पाने वाले डॉ0 बी0के0 अग्रवाल ने मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय सभागार में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के आयोजन किया था। इस दौरान उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने टीबी उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। टीबी उन्मूलन के लिए अब स्वास्थ्य विभाग जनांदोलन की राह चलेगा और सबसे पहले जनप्रतिनिधियों समेत जिले के आला अधिकारियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स और विद्यालयों को इस जनांदोलन से जोड़ेगा।

टीबी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य महकमा जनपद में बेहतर कार्य कर रहा है। इस संबंध में बताते हुए जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ0 बी0के0 अग्रवाल ने बताया कि “नव सृजित दोनों ब्लाकों कोन तथा कर्मा में नई टीबी यूनिटें क्रियाशील हो गयी हैं। अभी जनपद में कुल 11 टीबी यूनिट के अधीन 27 माइक्रोस्कोपी सेण्टर क्रियाशील है, जहाँ माइक्रोस्कोपी द्वारा बलगम की नि:शुल्क जाँच व उपचार की सुविधा उपलब्ध है। एक सीबीनॉट लैब तथा 4 ट्रू नॉट लैब के अतिरिक्त डिजिटल एक्सरे की सुविधा भी निःशुल्क उपलब्ध है। सीबीनॉट एवं ट्रूनॉट मशीनों से हम मरीज का इलाज शुरू करने से पहले यह पता कर लेते हैं कि मरीज के लिए कौन सी दवा सबसे ज्यादा कारगर होगी। वर्ष 2020 में जनपद में कुल 2659 टीबी मरीजों की पहचान की गई, इनमें से 56 मरीज एमडीआर टीबी के पाये गये। कुल 2659 मरीजों में से 468 मरीज प्राइवेट चिकित्सालयों द्वारा नोटिफाई किये गये। वर्तमान में जनपद में 1553 टीबी मरीज उपचाररत हैं जिनका उपचार ट्रीटमेण्ट सपोर्टर (आशा) के सहयोग से उनके घर पर ही उपलब्ध कराया जा रहा है। महामहिम राज्यपाल आनंदी बेन पटेल की प्रेरणा से पूरे प्रदेश में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को गोद लेने के क्रम में जनपद सोनभद्र में विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से टीबी पीड़ित 581 बच्चों में 93 बच्चों को गोद लिया गया जिसमें से 42 पूरा इलाज लेकर पूर्ण रूप से स्वस्थ हो चुके हैं तथा 50 मरीज अभी भी उपचाररत हैं। टीबी के प्रत्येक मरीज को निःक्षय पोषण योजना के अन्तर्गत इलाज के दौरान पौष्टिक आहार हेतु नियमित रूप से ₹500/- प्रतिमाह की धनराशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जा रही है।”

स्वास्थ्य विभाग टीवी जैसी बीमारी को लेकर भले ही चिंतित हो और जिले को क्षय रोग मुक्त बनाना चाहती हो मगर सोनभद्र में जिस तरह से प्रदूषण लगातार बढ़ रहे हैं वह निश्चित तौर पर स्वास्थ्य विभाग के लिए आगे चल कर चिंता का सबब बन सकता है। क्योंकि प्रदूषण की मार झेल रहे ओबरा विधायक ने इस मुद्दे को स्वमं उठाया था लेकिन उनकी भी नहीं सुनी गई। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिरकार सोनभद्र में प्रदूषण के रहते जिला क्षय मुक्त कैसे हो सकता है? बहरहाल खनन विभाग स्वमं मुख्यमंत्री के पास है और सीएम खुद 2025 तक पूरे देश को क्षय मुक्त होना देखना चाहते हैं। ऐसे में सोनभद्र कब तक प्रदूषण मुक्त हो सकेगा यह देखना भी काफी दिलचस्प होगा।

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