उत्पीडन के खिलाफ अभियंता संघ ने अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक को लिखा पत्र

कृपाशंकर पांडे (संवाददाता)

-मैन ,मैटेरियल व मनी की कमी ही लक्ष्य प्राप्त न होने का मुख्य वजह

ओबरा। निगम प्रबंधन द्वारा उत्पीड़न के खिलाफ उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के ओबरा इकाई के अभियंता लामबंद हो गए हैं। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ ओबरा के सदस्यों ने आपातकालीन बैठक कर उच्च प्रबंधन द्वारा उत्पीड़न के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया और विद्युत उत्पादन व अन्य पैरामीटर्स के लक्ष्य की प्रप्ति न होने का मुख्य वजह निगम प्रबंधन द्वारा परियोजनाओं को समुचित मैन,मटेरियल व मनी उपलब्ध न कराना बताया। विदित हो कि विगत 25 फरवरी को निदेशक, तकनीकी द्वारा सभी परियोजना प्रमुखों को एक पत्र जारी किया गया जिसमें पावर प्लांट के विभिन्न पैरामीटर्स को प्राप्त न करने की स्थिति में विभिन्न डिवीजनों के अधिशासी अभियंता,सहायक अभियंता एवं अवर अभियंता को आने वाले समय में दोषी ठहराया जाएगा। इस पत्र से पूरे मनोयोग से उत्पादन निगम में कार्य कर रहे अभियंताओं व कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है। बैठक में लिए गए निर्णय के बाद अभियंता संघ ओबरा पिपरी क्षेत्र के क्षेत्रीय सचिव इं अंकित प्रकाश ने उत्पादन निगम के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक,निदेशक तकनीकी,निदेशक कार्मिक सहित कई उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर विगत 25 फरवरी को जारी समस्त चेतावनी पत्रो व आरोप पत्रों को निरस्त करते हुए परियोजनाओं को आवश्यक मैन,मटेरियल व मनी की मांग की है।पत्र के माध्यम से प्रबंध निदेशक को अवगत कराया गया है कि ओबरा तापीय परियोजना में खाली पड़े 352 टेक्नीशियन, 118 अवर अभियंता एवम 31 सहायक अभियंता के पदों पर नियुक्ति नहीं की जा रही है।निगम में 100 से अधिक अधिशासी अभियंता के पद खाली होने के बावजूद सीधी भर्ती से आये 2008 बैच के सहायक अभियंताओं को अधिशासी अभियंता के पद पर प्रोन्नत नही किया जा रहा है। परियोजनाओं में पर्याप्त मैन पावर न मिल पाने से इकाईयों के निर्माण , परिचालन व अनुरक्षण कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रबंधन द्वारा बार बार अस्वासन दिए जाने के बावजूद अभी तक 200 मेगावाट की इकाईयों के आरएंडएम के बाद भी ओएंडएम फंड में कोई इजाफा नहीं किया गया है जिसकी वजह निर्धारित पैरामीटर प्राप्त करने के लिए मेंटेनेंस हेतु जरूरी स्पेयर्स मिलने में एवं गुडवत्ता युक्त कार्य कराने में कठिनाई हो रही है।ओबरा का परिचालन एवं अनुरक्षण मद में निर्धारित मासिक फंड लगभग एक दशक से 3 करोड़ 58 लाख है जबकि इस दौरान लेबर कॉस्ट और मटेरियल कॉस्ट में काफी इजाफा हुआ है ।इसलिए अब मासिक फंड पांच करोड़ की जाने की आवश्यकता है।लगभग दो साल से बीजकों का भुगतान न होने से बहुत से प्रतिष्ठित फर्में निविदा में भाग ही नही ले रही हैं।

एनसीएल का लगभग 2500 करोड़ का भुगतान निगम द्वारा न करने से एनसीएल द्वारा अब गुडवत्ता युक्त पर्याप्त कोयले की सप्लाई नही की जा रही है।जिससे अब ओबरा में काफी दूर स्थित बीसीसीएल की खदान से खराब गुडवत्ता की हार्ड कोयले की सप्लाई हो रही है।खराब कोयले से जहां एक तरफ मिल,कन्वेयर बेल्ट इत्यादि पार्ट्स के वियर एवम टियर बढ़े है ,इकाईयों के बरेअक डाउन बढ़े हैं वहीं दूसरी तरफ कोयले का ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट भी बढ़ा है।जिससे बिजली उत्पादन लागत भी बढ़ा है।पत्र में इकाईयों का वार्षिक ओवरहालिंग समय से न किया जाना,रिटर्न ऑफ इक्विटी 16 प्रतिशत से 2 प्रतिशत किया जाना,कार्मिकों का उत्पादन प्रोत्साहन भत्ता बंद किया जाना,बिजली कार्मिकों को जबरन आरोप पत्र देकर उनमें भय का वातावरण उत्पन्न करना निगम की आर्थिक क्षति व विद्युत उत्पादन लक्ष्यों को प्राप्त न कर पाने का मुख्य वजह बताया गया है।जिसके लिए बिजली कर्मी नही अपितु निगम प्रबंधन जिम्मेदार है।



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