घिवही के रेघड़ा शिवलिंग से जुड़ी है वंशीधर मूर्ति की गाथा,पढ़े पूरी खबर

धर्मेन्द्र गुप्ता(संवाददाता)

-महुली स्थित शिव पहाड़ी से खुदायी के दौरान मिलने की है किंवदंती

विंढमगंज। गुप्तकाशी के नाम से विख्यात सोनभद्र अपने आप में अनेक धार्मिक विरासत संजोए हुए है।ऐसी ही एक विरासत है घिवही गाँव स्थित मंदिर में विराजमान शिवलिंग। इसकी चमत्कारिक शक्तियों के बारे मे प्रचलित किंवदन्तियां भी इसे अलौकिक स्वरूप प्रदान करती है। शिवरात्रि के दिन यहाँ लगने वाला विशाल मेला भी दुद्धी इलाक़े के साथ साथ झारखण्ड के गढ़वा जिला तथा छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर जिले के लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र होता है।

पं .गुप्तनाथ तिवारी द्वारा लिखित दुद्धी प्रदीपिका के अनुसार क़रीब 500 साल पूर्व नगर ऊटारी, झारखण्ड के राजा भवानी देव व महुली के राजा बरियार शाह के बीच युद्ध हुआ जिसमें युद्धस्थल पर महुली के राजा बरियार शाह को मार गिराने के बाद नगर ऊटारी के राजा भवानी देव ने महुली स्थित शिव पहाड़ी की खुदाई करायी थी।

जहाँ से 32मन की सोने की बंशीधर की मूर्ति तथा विशाल शिवलिंग मिला , जिन्हे राजा भवानी हाथी पर लादकर नगर के लिए चले। घिवही गाँव के पास जैसे ही शिवलिंग लदा हाथी पहुँचा,हाथी एकाएक बैठ गया। फिर लाख प्रयास के बाद भी हाथी शिवलिंग को लेकर नहीँ उठ पाया। तब भवानी देव ने शिवलिंग को घिवही गाँव में ही छोड़कर वंशीघर की मूर्ति लेकर नगर ऊटारी चले गये। इसके बाद क्षेत्र के लोगों ने घीवही गाँव में रेघडा नामक स्थान पर इस शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा की। किवदन्तियों के अनुसार उस समय 32मन घी तथा उतना ही दूध से भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग का अभिषेक कर प्राण प्रतिष्ठा करायी गयी थी। तब से लेकर आज तक उक्त घिवही गाँव के रेघडा नामक स्थान पर हर साल महाशिवरात्रि के दिन मेले का आयोजन होता है।

शिवपहाड़ी में अब भी कई रहस्य छिपे रहने की होती रहती है चर्चाएं :

मान्यता है कि अब भी महुली के शिव पहाड़ी में कई धार्मिक धरोहरें छिपी हुयी है।इलाक़े के बुजुर्गों का मानना है कि यह स्थान प्राचीन समय में विख्यात धार्मिक स्थली रही है।किंवदंती के अनुसार पहाड़ी के गर्भ मे अब भी राधा की सोनें की मूर्ति व भगवान बंशीधर की सैयाँ से जुड़े अन्य वस्तुऍ इसी पहाड़ी में छिपी हुयी है।ऐतिहातन तौर पर पहाड़ी में क्या क्या छिपा है यह तो शोध का बिषय है लेकिन इतना ज़रूर है कि अगर शिव पहाड़ी से लगायत बंशीधर धाम तक पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाये तो यह इलाका पर्यटन के क्षितिज पर चमकता नूर साबित हो सकता है।

शिव पहाड़ी के पास से मिल चूकी है कीमती वस्तुएँ:

अभी महज छ: ,सात वर्ष पूर्व ही शिव पहाड़ी के पास राजा बरियार शाह के खण्डहर से महुली निवासी एक हलवाहे को हल चलाते समय अष्टधातु के बर्तन तथा अन्य समान मिला था।जिस सन्दर्भ में सूचना पर पहुँची विंढमगंज पुलिस ने कब्जे में लेकर पुरातत्व विभाग के माध्यम से लखनऊ के संग्रहालय में सुरक्षित जमा करा दिया था।



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