नपा सभासदों के वायरल पत्र से गरमाई राजनीति, पत्र को लेकर उठे सवाल

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । जिले का एक मात्र नगर पालिका परिषद रॉबर्ट्सगंज में इन दिनों अंदर खाने में जो खिचड़ी पक रही है वह शायद ही किसी को पता हो लेकिन जनपद न्यूज Live के हाथ लगी एक महत्वपूर्ण वायरल पत्र ने कई राज खोल दिये।

दरअसल नगर पालिका परिषद में 23 सभासद एक साथ नाराज चल रहे हैं। नाराजगी बढ़ी तो सभी एक साथ धरने पर बैठ गए। पहले दिन धरना शुरू हुआ तो आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया। नगर पालिकाध्यक्ष वीरेंद्र जायसवाल ने तो धरने पर बैठे सभासदों को ठेकेदार तक बता दिया। उन्होंने तो यहाँ तक कह दिए कि इस्तीफा दे दूंगा लेकिन इस बार सभासदों के आगे झुकूंगा नहीं। जब यह बात धरना दे रहे सभासदों तक पहुंची तो उनका भी पारा चढ़ गया। सभासदों ने कहा कि वे भी चाहते हैं कि गायब खसरा रजिस्टर समेत 9 सूत्रीय मांगों की निष्पक्ष जांच हो जाए, यदि ऐसा नहीं हुआ तो सभी 23 सभासद एकसाथ इस्तीफा दे देंगे लेकिन झुकेंगे नहीं।

दोनों तरफ से तनाव बढ़ा तो सत्ताधारी पार्टी में भी हलचल बढ़ने लगी। पार्टी के लिए सबसे पहले डैमेज कंट्रोल करना जरूरी था क्योंकि नाराज सभासदों में ज्यादातर सत्ताधारी पार्टी के बताए जा रहे थे और फिर अध्यक्ष भी सत्ताधारी पार्टी से ही हैं। लगातार हो रही किरकिरी को देखते हुए सत्ताधारी पार्टी ने अपने भरोसेमन्द जिला महामंत्री व पूर्व चेयरमैन मुरारी गुप्ता को सभासदों से वार्ता के लिए भेजा। कई घण्टे चली वार्ता के बाद आखिरकार सभी सभासद जिला महामंत्री के आश्वासन पर धरना खत्म करने को राजी हो गए लेकिन सभी 23 सभासदों ने अपने हस्ताक्षर से एक पत्र सत्ताधारी पार्टी के जिलाध्यक्ष के नाम लिखा, जिसमें उन्होंने लिखा कि नगर पालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार से जनमानस में पार्टी की छवि खराब हो रही है, इसलिए इसकी जांच करानी आवश्यक है।
उन्होंने आगे और लिखा कि 10 दिनों के भीतर सभी समस्याओं का हल करने का आश्वासन मिला है, यदि समस्या का निराकरण नहीं हुआ तो सभी सभासद पुनः धरने पर बैठने को मजबूर हो सकते हैं।

वायरल पत्र पर कई सवाल उठने लाजमी है। पहला तो यह कि जीरो टॉलरेंस वाली सरकार में क्या वास्तव में नगर पालिका परिषद में भ्रष्टाचार हो रहा है, जैसा सभासद आरोप लगा रहे हैं या फिर चेयरमैन की बातों को सही माने जो यहां तक कह दिए कि सभी ठेकेदार हैं और इस बार वे झुकेंगे नहीं।

दूसरा बड़ा सवाल इस पत्र को लेकर यह भी उठ रहा है कि आखिर सभासदों ने जिलाध्यक्ष को सीधे पत्र क्यों लिखा, क्या इन दिनों सत्ताधारी पार्टी का नगर पालिका परिषद पर ज्यादा दबाव है । यह सवाल इसलिए उठना शुरू हो गया क्योंकि सभासदों ने पत्र के अंतिम लाइन में लिखा कि यदि समस्याओं का निस्तारण नहीं हुआ तो वे दोबारा घरने पर बैठ सकते हैं।

बड़ा सवाल निकल कर यहां यह भी आता है कि आखिर समस्याओं की जांच कौन करेगा ? जाहिर है कोई सरकारी मुलाजिम। तो जांच में अधिकारी जो सही होगा वह रिपोर्ट पेश करेगा। इसमें सत्ताधारी पार्टी को पत्र लिखने का सभासदों का यह तरीका किसी को गले नहीं उतर रहा। बहरहाल धरना खत्म हुए लगभग 4 दिन बीत चुके हैं अब देखने वाली बात यह है कि भ्रष्टाचार के इस मामले में जांच रिपोर्ट क्या निकल कर सामने आती है। क्योंकि दोनों तरफ से न झुकने व इस्तीफा देने तक की बात कही गयी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिर कौन सच बोल रहा और कौन दबाव बना रहा।



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